गया(बिहार)-भाकपा माओवादी के सब जोनल कमांडर ने पुलिस के समक्ष किया आत्मसमर्पण ॥

गया-भाकपा माओवादी के सब जोनल कमांडर ने पुलिस के समक्ष किया आत्मसमर्पण,कई नक्सली घटनाओं में था शामिल,बोले एसएसपी- समाज की मुख्यधारा में स्थापित करने को लेकर सरकारी योजनाओं का दिलाया जाएगा लाभ।

बिहार के उग्रवाद प्रभावित नक्सल क्षेत्र चक्कर बंधा में नक्सलियों के जोनल कमांडर अखिलेश भुइयां ने गया पुलिस के समक्ष आज आत्मसमर्पण कर दिया। जोनल कमांडर अखिलेश भुईया दर्जनों नक्सली घटनाओं का दोषी है। गया के एसएसपी कार्यालय में आज आत्मसमर्पण करते हुए अपने नक्सली जीवन की शुरुआत कैसे हुई ? इसके बारे में एसएसपी के समक्ष पूरी कहानी बताई। एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि अखिलेश भुइयां ने अपने गोतिया द्वारा जमीन हड़प लिए जाने से परेशान नक्सली के शरण में गया था , जहां नक्सलियों ने उसके गोतिया से जमीन वापस दिलाने के आश्वासन पर नक्सली टीम में शामिल कर लिया। यहीं से शुरू हुआ अखिलेश भुईयां की प्रतिशोध की कहानी। आज आत्मसमर्पण के दौरान अखिलेश भुंइयाँ ने यह खुलासा किया कि आज तक उसकी जमीन नक्सलियों ने नहीं दिलवाई बल्कि नक्सली जीवन में दर्जनों घटनाओं को अंजाम देने में जोनल कमांडर बने अखिलेश को इस कुकृत्य का हिस्सेदार बनाया। सन 2011 में अखिलेश ने नक्सली संगठन में शामिल हुआ इसके बाद अपराध की दुनिया का बादशाह बन गया। अखिलेश सन 2017 में गया जिले के आमस में सोलर पावर प्लांट को उड़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। 2018 में बांके बाजार में पुलिस पार्टी पर हमले का भी मुख्य अभियुक्त था। जोनल कमांडर अखिलेश 2020 में स्कूल भवन को उड़ाने तथा लुटुआ में पुलिस मुठभेड़ में पुलिस पर हमला करने में शामिल रहा जोनल कमांडर अखिलेश को पुलिस ने सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी। पुलिस के बढ़ते दबाव और नक्सलियों द्वारा शोषण का शिकार अखिलेश अंततः पुलिस की शरण में जाकर आत्मसमर्पण करना बेहतर समझा। आज गया के एसएसपी राजीव मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए उन्होंने स्वीकार किया के औरंगाबाद के देव में विधान पार्षद राजेश सिंह के मकान को डायनामाइट लगाकर उड़ाने में भी शामिल था। गया के एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि अखिलेश ने प्रतिशोध की भावना लेकर नक्सलियों की शरण ली थी। आज पुलिस के शरण में आने के बाद बेहतर जिंदगी जीने की उम्मीद और मुख्यधारा में जुड़ कर समाज के साथ जीने के लिए सरकार द्वारा मुहैया कराए गए आत्मसमर्पण के बाद सुविधाएं अखिलेश और उसके परिवार को दी जाएगी। एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स, एसटीएफ , सीमा सशस्त्र बल , कोबरा बटालियन और गया पुलिस ने उम्मीद जाहिर की है कि जोनल कमांडर अखिलेश के आत्मसमर्पण के बाद नक्सल प्रभावित गया और औरंगाबाद के इलाकों में नक्सली गतिविधियों में काफी कमी आएगी। एसएसपी राजीव मिश्रा से पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्री मिश्रा ने बताया कि जोनल कमांडर अखिलेश की जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए विधि संवत कार्रवाई कराई जाएगी , क्योंकि आज तक जिस वजह से अखिलेश ने नक्सलियों की शरण ली थी वह समस्या आज भी बरकरार है। अब देखना यह है कि नक्सलियों की शरण से वापस आया अखिलेश भुईयां को क्या उसकी जमीन वापस दिलाने में पुलिस और प्रशासन कितनी अहम भूमिका निभाती है।

  

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