आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में बिहार के प्रथम सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस का शुभारंभ
- by Manjesh Kumar
- 20-Aug-2026
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प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डॉ शामिका रवि ने कुलपति के नेतृत्व और पहल की सराहना की
पटना: आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में गुरुवार को बिहार के प्रथम सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस का विधिवत शुभारंभ किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में नीति-निर्माण, शहरी विकास, प्रशासन, शिक्षा और शोध के क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि, विशेषज्ञ, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने शहरीकरण से जुड़ी समकालीन चुनौतियों पर अकादमिक विमर्श को एक नया आयाम दिया तथा विश्वविद्यालय, सरकार और शोध संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाओं को मजबूत किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डॉ शामिका रवि थीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ राजभूषण चौधरी तथा सांसद शांभवी चौधरी उपस्थित रहीं। अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (डॉ) शरद कुमार यादव ने कहा कि सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस की स्थापना केवल एक नए अकादमिक केंद्र का शुभारंभ नहीं है, बल्कि भारत के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर शोध, संवाद और नीति-विमर्श के लिए एक समर्पित मंच का निर्माण है। उन्होंने कहा कि भारत में शहरीकरण की गति लगातार बढ़ रही है और इसके साथ शहरों के सामने अनेक नई चुनौतियां उभर रही हैं। आवास, परिवहन, जलापूर्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आधारभूत संरचना, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोजगार, तकनीक, सामाजिक समावेशन और जलवायु-लचीलापन जैसे विषय आज शहरी नीति के केंद्र में हैं।
कुलपति ने कहा कि इन चुनौतियों का समाधान किसी एक विषय या क्षेत्र के सीमित दृष्टिकोण से संभव नहीं है। इसके लिए अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन, इंजीनियरिंग, प्रशासन, सार्वजनिक नीति, डेटा विज्ञान और अन्य विषयों के बीच समन्वित एवं बहुविषयक दृष्टिकोण आवश्यक है। सेंटर का उद्देश्य इसी दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना है, ताकि शहरी समस्याओं को उनके सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और प्रशासनिक संदर्भों में समझा जा सके तथा उनके लिए प्रमाण-आधारित और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि सेंटर शोध, नीति और व्यावहारिक शासन के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करे। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को वास्तविक शहरी समस्याओं, स्थानीय संस्थाओं, समुदायों और उपलब्ध आंकड़ों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे अकादमिक ज्ञान को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने में मदद मिलेगी और युवा शोधकर्ताओं को नीति निर्माण की प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर प्राप्त होगा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ शामिका रवि ने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति की पहल, दूरदृष्टि और नेतृत्व की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा शहरी नीति और शासन जैसे समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषय पर केंद्र की स्थापना एक दूरदर्शी कदम है। उन्होंने विश्वविद्यालय के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज जब देश तेजी से शहरीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में अकादमिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती। उन्हें समाज और शासन के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं को समझने, उन पर शोध करने और प्रभावी समाधान के लिए नीति संवाद को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। डॉ रवि ने कहा कि शहरी नीति और शासन के क्षेत्र में अकादमिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को मजबूत कर सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालय की इस सोच की भी सराहना की कि उच्च शिक्षा संस्थानों को कक्षाओं और पाठ्यक्रमों से आगे बढ़कर समाज एवं शासन की वास्तविक चुनौतियों पर शोध और विमर्श का केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सेंटर आने वाले समय में शहरी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देगा तथा नीति-निर्माताओं और अकादमिक जगत के बीच सार्थक संवाद का मंच बनेगा।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ राजभूषण चौधरी ने अपने संबोधन में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में बेहतर आधारभूत संरचना और प्रभावी प्रशासन की आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शहरों के विकास के लिए स्वच्छता, पेयजल, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं की मजबूत व्यवस्था आवश्यक है। इसके साथ ही शहरी प्रशासन को अधिक जवाबदेह, सक्षम और नागरिक केंद्रित बनाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शहरी विकास केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों, स्थानीय निकायों और समाज के बीच बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति की दूरदर्शी पहल की विशेष सराहना करते हुए कहा कि सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस की स्थापना बिहार में शहरी नीति और प्रशासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सेंटर शोध और नीति-विमर्श के माध्यम से राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देने में योगदान करेगा।
शांभवी चौधरी ने अपने संबोधन में अपने स्कूल एवं कॉलेज जीवन के अनुभव साझा करते हुए शहरी विकास और सुशासन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन से ही शहरों में उपलब्ध सुविधाओं और सार्वजनिक व्यवस्थाओं को समझना महत्वपूर्ण है। परिवहन, स्वच्छता, जल व्यवस्था, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक स्थान और नागरिक सुविधाएं सीधे तौर पर लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि शहरी विकास को केवल सड़कों, भवनों और अन्य भौतिक संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं किया जा सकता। बेहतर शहरी विकास के लिए पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन, नागरिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन और समान अवसर भी आवश्यक हैं। उन्होंने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा सेंटर की स्थापना को दूरदर्शी पहल बताते हुए इसकी सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को शहरी विकास की नई संभावनाओं पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
कुलपति ने बिहार के संदर्भ में सेंटर की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य के शहर तेजी से बदल रहे हैं। शहरीकरण के साथ जहां आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, वहीं आधारभूत संरचना, सार्वजनिक सेवाओं, नगर निकायों की क्षमता, यातायात प्रबंधन, आवास, जल एवं स्वच्छता तथा पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के शहरी विकास के लिए ऐसे नीतिगत समाधान आवश्यक हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों, जनसंख्या की आवश्यकताओं, उपलब्ध आंकड़ों और संस्थागत क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि सेंटर बिहार के शहरी संदर्भ में प्रमाण-आधारित शोध को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। शहरों की विकास संबंधी चुनौतियों का अध्ययन करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों, संस्थागत व्यवस्थाओं और नागरिकों की आवश्यकताओं को समझना सेंटर की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। इससे स्थानीय निकायों और नीति-निर्माताओं को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।
सेंटर के माध्यम से सरकार, शहरी स्थानीय निकायों, शोध संस्थानों, विकास एजेंसियों, विशेषज्ञों और अन्य विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। सेंटर में विशेषज्ञ व्याख्यान, नीति संवाद, शोध परियोजनाएं, अंतर्विषयक अध्ययन, कार्यशालाएं, क्षेत्रीय अध्ययन तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को शहरी विकास की जटिलताओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें शोध एवं नीति-विश्लेषण की व्यावहारिक समझ प्रदान करना होगा। कार्यक्रम के दौरान शहरी विकास, सुशासन, नीति-निर्माण, शोध, नागरिक सहभागिता, स्थानीय शासन और भविष्य की शहरी चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के शहरों के सतत एवं समावेशी विकास के लिए प्रमाण-आधारित नीति, मजबूत स्थानीय संस्थाएं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकगण एवं पदाधिकारी, विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी तथा पटना स्थित अन्य शोध संस्थानों के शिक्षक एवं शोधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विद्यार्थियों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक अकादमिक स्वरूप प्रदान किया। उपस्थित प्रतिभागियों ने सेंटर के शुभारंभ को शहरी नीति एवं शासन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अकादमिक पहल बताते हुए इसमें गहरी रुचि व्यक्त की। कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में सेंटर विभिन्न शहरी मुद्दों पर शोध एवं प्रशिक्षण के साथ-साथ नीति-निर्माताओं और अकादमिक जगत के बीच संवाद को संस्थागत रूप देने का प्रयास करेगा। विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग, साझा शोध परियोजनाएं, ज्ञान-विनिमय और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान से बिहार तथा देश के अन्य क्षेत्रों में शहरी विकास से जुड़े अध्ययन को नई गति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस ऐसा मंच बने, जहां कठोर एवं प्रमाण-आधारित शोध सार्वजनिक नीति को दिशा दे, नीति से जुड़े प्रश्न नए शोध को प्रेरित करें और युवा पीढ़ी देश के शहरी विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार हो। उन्होंने कहा कि सेंटर का वास्तविक उद्देश्य केवल अकादमिक गतिविधियों का विस्तार करना नहीं, बल्कि ज्ञान को समाज और शासन की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना है।
कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस शहरी नीति, प्रशासन और विकास से जुड़े विषयों पर शोध, प्रशिक्षण, संवाद और सहयोग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे तेजी से बदलते राज्य में शहरी विकास के क्षेत्र में स्थानीय अनुभवों और प्रमाणों पर आधारित ज्ञान का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय इस दिशा में अपनी अकादमिक क्षमता और विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए सरकार, स्थानीय निकायों, शोध संस्थानों तथा समाज के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि सेंटर आने वाले समय में ज्ञान, सहयोग, शोध और जनहितकारी नीति-विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। विश्वविद्यालय और पटना स्थित अन्य शोध संस्थानों के शिक्षकों एवं शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने भविष्य में संयुक्त शोध, अकादमिक संवाद और संस्थागत सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत किया। सेंटर का शुभारंभ आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिसके तहत विश्वविद्यालय समकालीन सामाजिक एवं विकासात्मक चुनौतियों पर गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करते हुए शिक्षा, नीति और समाज के बीच सार्थक संबंध स्थापित करना चाहता है।


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