वर्तमान रबी फ़सल के अंतर्गत आनेवाले मुख्य फ़सल गेहूं की कटनी के पश्चात वैकल्पिक खेती के तौर पर मिलेट क्रॉप (मोटा अनाज) की खेती होगा लाभकारी



मिलेट क्रॉप(मोटा अनाज) के सेवन से हमारा शरीर स्वस्थ एवम निरोग रहता है।


अश्वनी कुमार, समस्तीपुर 


समस्तीपुर ( हसनपुर/बिथान) : वर्तमान समय में प्रतिकूल जलवायु में खेती करना बहुत कठिन है।इसके लिए कृषि के क्षेत्र में नवीनतम तथा वैकल्पिक तकनीक अपनाकर किसानों की आर्थिक स्थिति को बहुत हद तक सुदृढ़ किया जा सकता है। इस बाबत बिहार सरकार के कृषि विभाग के अंतर्गत हसनपुर प्रखंड में कार्यरत वरिष्ठ कृषि सलाहकार सुभाषचंद्र उर्फ विदुर जी झा ने बताया की वर्तमान रबी फ़सल के अंतर्गत आनेवाले मुख्य फ़सल गेहूं की कटनी के पश्चात किसानों के खेत आगामी खरीफ फ़सल की बुआई से पहले 70 से 80 दिनों तक खाली रह जाते है। इसलिए किसानों को इस बीच वैकल्पिक खेती के तौर पर मिलेट क्रॉप(मोटा अनाज)के रूप में मरुआ, चीना,कौनी, सामा, बाजरा आदि की खेती करनी चाहिए जो की उनके लिए बहुत लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया की मिलेट क्रॉप(मोटा अनाज)की खेती कम जुताई और कम लागत में अच्छी पैदावार देती है। इससे किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में काफी सहायता मिल सकेगी।साथ ही  मिलेट क्रॉप(मोटा अनाज)के सेवन से शरीर के स्वस्थ एवम निरोग रहने की भी बात भी उन्होंने कही। इसके लिए उन्होंने किसानों से अपने मोबाइल नंबर 9955787844 पर आवश्यक सुझाव प्राप्त करने के साथ साथ मिलेट क्रॉप की खेती के लिए हसनपुर प्रखंड ई किसान भवन से बीज की उपलब्धता के संबंध में संपर्क किए जाने का आह्वान किया।

  

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