गया जी में धान की सीधी बुआई में कीट एवं रोग प्रबंधन पर प्रक्षेत्र दिवस आयोजित
- by Manjesh Kumar
- 18-Sep-2026
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गया जी: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर एवं कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर, गया के संयुक्त तत्वावधान में धान-परती भूमि परियोजना के अंतर्गत धान की सीधी बुआई में कीट एवं रोग प्रबंधन विषय पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी सहित कृषि विभाग के पदाधिकारियों तथा लगभग 100 स्थानीय किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर गया जी के जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार ने किसानों के बीच धान की सीधी बुआई तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने तथा इसके प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने तकनीक से लगाए गए धान के प्रक्षेत्र का भ्रमण कर फसल की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और इसकी प्रगति की सराहना की। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को जिले के अन्य प्रखंडों के किसानों को भी इस प्रक्षेत्र का भ्रमण कराने तथा तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन दिखाने का सुझाव दिया, जिससे किसान इसके व्यावहारिक लाभों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को धान की सीधी बुआई के प्रमुख लाभों के साथ-साथ फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान तथा उनके समेकित प्रबंधन की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने फसल की नियमित निगरानी, कीट एवं रोगों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान तथा आवश्यकता एवं अनुशंसा के अनुरूप उचित नियंत्रण उपाय अपनाने पर विशेष बल दिया। कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों ने प्रक्षेत्र प्रदर्शन के माध्यम से धान की सीधी बुआई, फसल प्रबंधन तथा कीट-रोग नियंत्रण के विभिन्न पहलुओं को व्यावहारिक रूप से समझाया। किसानों ने फसल प्रबंधन एवं कीट-रोग नियंत्रण से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर, गया जी के प्रमुख, वैज्ञानिक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मी उपस्थित रहे।
प्रक्षेत्र दिवस का उद्देश्य धान परती भूमि के प्रभावी उपयोग, उत्पादन लागत में कमी, संसाधनों के दक्ष उपयोग तथा टिकाऊ एवं लाभकारी धान उत्पादन के लिए धान की सीधी बुआई तकनीक को किसानों के बीच प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ अनुप दास के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन एवं वित्तीय सहयोग अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत किया गया।


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