गंडक नदी का तटबंध टूटने के मामले में राज्य सरकार की बड़ी कार्रवाई, 8 इंजीनियर नप गए

पटना: बीते दिनों गंडक नदी में बढ़े जलस्तर ने बिहार में काफी तबाही मचाई है। इस दौरान कई जगहों पर तटबंध भी टूटे जिससे तबाही और भी अधिक हुई। तटबंध की सुरक्षा मे लापरवाही के आरोप में अब राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है और बड़ी कार्रवाई भी की है। सरकार ने तटबंध की सुरक्षा में लापरवाही के आरोप में 8 इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। छपरा के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, गोपालगंज के कार्यपालक अभियंता मो साजिद इकबाल, छपरा के सहायक अभियंता सुनील कुमार, विनोद कुमार, गोपालगंज के सहायक अभियंता मो जावेद अंसारी, छपरा के कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार तथा गोपालगंज के कनीय अभियंता विकास कुमार को निलंबित किया गया है।

विभाग के अनुसार नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव हुआ। नेपाल के देवघाट में गंडक का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को पार कर गया और नया रिकॉर्ड बना। बिहार में भी बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में नदी का जलस्तर पुराने उच्चतम स्तर को पार करते हुए नए रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान कई स्थानों पर गंडक के तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। हालांकि अब नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। सारण के रेवाघाट में जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से 177 सेमी घट चुका है और खतरे के निशान से 50 सेमी नीचे आकर सामान्य हो गया है। वैशाली के लालगंज में भी जलस्तर नए उच्चतम स्तर से 130 सेमी घटा है, लेकिन अभी यह खतरे के निशान से 52 सेमी ऊपर है। विभाग के मुताबिक लालगंज में भी जलस्तर तेजी से घट रहा है और अगले 24 घंटे पटना में खतरे के निशान से नीचे आने की संभावना है। >

विभाग के अनुसार फिलहाल तटबंधों पर जलस्तर का दबाव नहीं है और सीपेज तथा पाइपिंग की समस्या भी नहीं है। क्षतिग्रस्त तटबंधों के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त फ्लड फाइटिंग मटेरियल का स्टॉक किया गया है। कट-एंड को सुरक्षित करने और टैगिंग का काम जारी है। विभाग ने बताया कि क्षतिग्रस्त तटबंधों का वरीय पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने तत्काल स्थल निरीक्षण कर आकलन किया था। इसके बाद आकस्मिक कार्य योजना के तहत तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया, लेकिन कुछ स्थानीय अभियंताओं द्वारा इसके क्रियान्वयन में शिथिलता और लापरवाही बरती गयी। जांच में सामने आया कि तटबंध क्षतिग्रस्त होने की आकस्मिक परिस्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया में देरी हुई। ब्रीच स्थल पर मौजूद रहकर मटेरियल और मैनपावर की मदद से कट-एंड को सुरक्षित करने के बजाय कुछ अभियंता स्थल से हट गये। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को तत्काल जुटाने में भी अक्षमता पायी गयी। मुख्यालय गोदाम पटना और अन्य जिलों से फ्लड फाइटिंग मटेरियल भेजने तथा अतिरिक्त अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति के बावजूद आकस्मिक कार्य योजना को जमीन पर लागू करने में शिथिलता बरती गयी।

  

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