एआई की मदद से तेज और पारदर्शी होंगे भूमि सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्य: उपमुख्यमंत्री

बंदोबस्त कार्यालयों में बनेगा विशेष एआई सेल, कर्मियों को दिया जाएगा चरणबद्ध प्रशिक्षण। समय सीमा में संभव हो सकेगा भूमि सर्वेक्षण, कमिटी में बंदोबस्त अधिकारी से लेकर विशेष सर्वेक्षण के सभी स्तर के कर्मी

पटना: उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के उपयोग से राज्य में भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों को अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर राजस्व प्रशासन को मजबूत किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को जमीन से जुड़े मामलों में सरल, त्वरित और बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एआई आधारित कार्यप्रणाली से विभाग की दक्षता बढ़ेगी और सर्वे के कार्य को तय समय सीमा में पूरा किया जा सकेगा।

राज्य में राजस्व प्रशासन को आधुनिक, अधिक प्रभावी और समय सीमा में पूरा करने की दिशा में अब विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जाएगा। इस संबंध में भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय ने राज्य के सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं

निदेशक सुहर्ष भगत की तरफ से जारी पत्र के अनुसार, जिलों के बंदोबस्त कार्यालयों में एआई सेल का गठन किया जाएगा, जो विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम में एआई के संभावित उपयोग पर कार्य करेगा। इस सेल की अध्यक्षता बंदोबस्त पदाधिकारी करेंगे, जबकि इसमें आईटी प्रबंधक, विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी (आईटी/इंजीनियरिंग), विशेष सर्वेक्षण कानूनगो और विशेष सर्वेक्षण अमीन सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

निर्देश के मुताबिक, एआई सेल की बैठक प्रत्येक शनिवार को दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक बंदोबस्त कार्यालय में आयोजित की जाएगी। यह समिति जिला स्तर पर एआई के उपयोग से जुड़े निर्णय लेने, कर्मियों को प्रशिक्षण के लिए नामित करने तथा एआई पाठ्यक्रम लागू करने का कार्य करेगी। प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मियों को परीक्षा के बाद प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा।

पत्र में कहा गया है कि 1 अप्रैल 2026 से बंदोबस्त कार्यों में एआई आधारित टूल्स के प्रारंभिक उपयोग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए संबंधित कर्मियों में जागरूकता बढ़ाने और आवश्यक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है। निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत सरकार द्वारा स्थापित इंडिया एआई मिशन और राज्य में चल रहे बिहार एआई मिशन के अनुरूप राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में यह पहल की जा रही है। एआई के उपयोग से कार्यों की गति, बेहतर निर्णय-प्रक्रिया और संभावित त्रुटियों या अनियमितताओं की पहचान करना आसान होगा। इससे तय सीमा में निर्धारित कार्यों की मॉनिटरिंग भी आसान हो जाएगी, जिससे तय समय पर सभी स्तर के काम संभव हो सकेंगे 

अधिकारियों से कहा गया है कि एआई टूल्स के उपयोग को बढ़ावा देकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 के अंतर्गत इज़ ऑफ लिविंग के लक्ष्य को साकार करने में राजस्व प्रशासन अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।

  

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