किशनगंज के सीमावर्ती इलाके में तस्करी का लगातार चल रहा है खेल, एसएसबी ने पूरे गिरोह का किया भंडाफोड़
- by Manjesh Kumar
- 08-Sep-2026
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किशनगंज: भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में तस्करी के खिलाफ 41वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल रानीडांगा की लगातार कार्रवाई और छापेमारी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार सघन निगरानी और विशेष अभियान के बीच भातगांव क्षेत्र में सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान पूछताछ में तस्करी के एक संगठित नेटवर्क के काम करने के तरीके से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पूछताछ में सामने आया कि तस्करी के सामान को डबल काली पॉलीथिन में पैक कर रात के अंधेरे में नदी के रास्ते नेपाल पार कराया जाता था। काली पॉलीथिन का इस्तेमाल इस तरह किया जाता था कि रात के अंधेरे में पैकेट आसानी से दिखाई न दे।
डबल पैकिंग के जरिए नदी पार कराने के दौरान सामान को सुरक्षित रखने का भी प्रयास किया जाता था। जानकारी के अनुसार, तस्करी के सामान को पहले सीमावर्ती इलाके में निर्धारित ठिकानों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद रात के समय मजदूरों की मदद से सामान को नदी के रास्ते नेपाल पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग भूमिका तय होने की बात पूछताछ में सामने आई है।पूछताछ में दौलत उर्फ समीम का नाम भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वह कथित तौर पर तस्करी का सामान नदी पार कराने के लिए मजदूरों की व्यवस्था करता था। बताया जा रहा है कि उसके संपर्क में करीब 15 मजदूर थे, जिन्हें सामान नदी के रास्ते सीमा पार कराने के बदले मेहनताना दिया जाता था। जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि नेपाल की ओर मौजूद कुछ लोग सीमा पार पहुंचने के बाद तस्करी के सामान को आगे दूसरे स्थानों तक भेजने का काम करते थे। इस तरह तस्करी का नेटवर्क सीमा के दोनों ओर अलग-अलग लोगों की भूमिका के जरिए संचालित होने की बात सामने आई है।
भातगांव क्षेत्र में सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और पूछताछ के बाद तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रास्तों और तरीकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। इसके बाद सशस्त्र सीमा बल द्वारा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। 41वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल रानीडांगा द्वारा सीमावर्ती इलाकों में लगातार छापेमारी और कार्रवाई किए जाने से तस्करी से जुड़े लोगों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। संवेदनशील इलाकों, नदी के रास्तों और सीमा से जुड़े वैकल्पिक मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सशस्त्र सीमा बल की लगातार कार्रवाई के बीच तस्करी के नेटवर्क से जुड़े तौर-तरीके सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। अब जांच का फोकस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, उनके संपर्कों और तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संभावित ठिकानों पर है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि सीमावर्ती क्षेत्र में भारत से नेपाल भेजे जाने वाले तस्करी के सामान के नेटवर्क में कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आने की सूचना है कि सीमा शुल्क प्रक्रिया, वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े दस्तावेज और बिल तैयार कराने की व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की कथित मदद से सामान को आगे बढ़ाया जाता था। हालांकि इस संबंध में किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां और संबंधित विभाग इस पहलू की भी जांच कर सकते हैं कि सामान की आवाजाही के लिए दस्तावेज और बिल किस स्तर पर तैयार किए जाते थे।भातगांव और कदमनिजोत की सशस्त्र सीमा बल टुकड़ियों के जवानों की संयुक्त कार्रवाई में मध्य रात्रि गुप्त सूचना के आधार पर सीमा स्तंभ संख्या 99 के आसपास विशेष घेराबंदी की गई।
कार्रवाई के दौरान भारत से नेपाल ले जाए जा रहे कपड़ा, दवा और बीज की बड़ी खेप को जब्त किए जाने की जानकारी है। इस दौरान सोना पिंडी–रविंदरपुर इलाके के महेंद्र सिंह, पुत्र हीरा सिंह, को पकड़े जाने की बात सामने आई है। वहीं, सूत्रों के अनुसार शमीम उर्फ दौलत, पुत्र दावीर, निवासी देनगुजोते, अपने करीब 10–12 वाहकों के साथ तस्करी के सामान को सीमा पार कराने की तैयारी में था। सूचना मिलते ही इलाके की घेराबंदी कर सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई की और बड़ी खेप को जब्त किया।


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