आरक्षण की हो समीक्षा तब सही लोगों को पहुंचेगा फायदा, मंत्री संतोष सुमन ने कही बड़ी बात...

पटना: एक तरफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आरक्षण हटाए जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है तो दूसरी तरफ बिहार सरकार में मंत्री और एनडीए के सहयोगी दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने बड़ा बयान दिया है। मंत्री संतोष सुमन ने आरक्षण के समीक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का फायदा सही और जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच रहा है इसलिए इसकी समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने आरक्षण खत्म किए जाने की बात नहीं कही लेकिन कोटे के अंदर कोटा वाला सुप्रीम कोर्ट के नसीहत का समर्थन किया। संतोष सुमन ने कहा कि उनकी पार्टी SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पहले भी समर्थन करती रही है और आगे भी करती रहेगी।

मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि दलित समाज के अंदर कुछ जातियों को आरक्षण का फायदा लंबे समय से ज्यादा मिल रहा है, जबकि कुछ जातियां अभी भी पीछे हैं। ऐसे में जो लोग सबसे ज्यादा पीछे हैं, उन्हें आगे लाने के लिए आरक्षण के अंदर अलग हिस्से तय करने पर विचार क्यों नहीं होना चाहिए। मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि आजादी के 79 साल बाद यह पूछना गलत नहीं है कि आरक्षण का फायदा किन वर्गों को कितना मिला है। साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि समाज के सबसे पीछे खड़े कौन से लोग अब भी इससे बाहर हैं। उन्होंने कहा कि अगर आरक्षण का मकसद सामाजिक रूप से पीछे लोगों को आगे बढ़ाना है, तो यह देखना भी जरूरी है कि इसका फायदा वास्तव में सबसे जरूरतमंद लोगों को मिल रहा है या नहीं। संतोष सुमन ने कहा कि दलित समाज को एक ही तरह का वर्ग नहीं माना जा सकता। इसके अंदर भी लोगों की सामाजिक, पढ़ाई और आर्थिक स्थिति अलग-अलग है। उनके मुताबिक, अगर कुछ जातियां आरक्षण का फायदा लगातार ज्यादा ले रही हैं और कुछ जातियां आज भी पीछे हैं, तो सबसे पिछड़े लोगों तक मौके पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण पर विचार होना चाहिए।

संतोष सुमन ने कहा कि देश में अलग-अलग वर्गों के बीच पिछड़ेपन को पहचानने के लिए पहले भी अलग व्यवस्था की गई है। सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए EWS की व्यवस्था है। इसी तरह पिछड़े वर्गों के अंदर पिछड़ा और अतिपिछड़ा की अलग पहचान की गई है। उन्होंने इसी तरह SC-ST समाज के अंदर भी जरूरत के हिसाब से अवसर पहुंचाने की बात कही। संतोष सुमन ने कहा कि देश में अलग-अलग वर्गों के बीच पिछड़ेपन को पहचानने के लिए पहले भी अलग व्यवस्था की गई है। सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए EWS की व्यवस्था है। इसी तरह पिछड़े वर्गों के अंदर पिछड़ा और अतिपिछड़ा की अलग पहचान की गई है। उन्होंने इसी तरह SC-ST समाज के अंदर भी जरूरत के हिसाब से अवसर पहुंचाने की बात कही।

संतोष सुमन ने साफ कहा कि आरक्षण की समीक्षा की बात का मतलब इसे खत्म करना बिल्कुल नहीं है। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने जो संवैधानिक अधिकार दिया, उसका फायदा उसके असली हकदार लोगों तक पहुंचना चाहिए। आरक्षण को बचाना है तो उसका फायदा भी सही तरीके से सबसे पीछे रह गए लोगों तक पहुंचना जरूरी है। आरक्षण रहे और उसका लाभ सबसे वंचित लोगों तक पहुंचे, यही असली सामाजिक न्याय है।

  

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