त्योहार की मिठास में मिलावट का डर, जांच के इंतजार में कुरसेला का बाजार
- by Manjesh Kumar
- 02-Nov-2026
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सिंथेटिक दूध और मावे के इस्तेमाल का संदेह, मिठाइयों व पनीर की जांच कराने की मांग
कटिहार: दीपावली समेत अन्य त्योहारों को लेकर कुरसेला प्रखंड और नगर पंचायत के हाट-बाजारों में मिठाइयों की बिक्री तेज हो गई है। इस बीच बंगाल से आने वाली सस्ती मिठाइयों की बढ़ती आपूर्ति और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने मिठाइयों में मिलावट की आशंका जताते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग से जांच और छापेमारी की मांग की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बंगाल और आसपास के इलाकों से कम कीमत पर रसगुल्ला, मिल्क केक और लड्डू सहित अन्य मिठाइयां लाकर छोटी दुकानों, होटलों और कई स्वीट्स कॉर्नर में बेची जा रही हैं। आशंका है कि अधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ मिठाइयों के निर्माण में घटिया दूध, सिंथेटिक मावा और हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों का दावा है कि 150 से 180 रुपये किलो की दर से खरीदा जाने वाला पनीर बाजार में करीब 400 रुपये किलो तक बेचा जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने के कारण मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग को बाजारों में विशेष अभियान चलाकर मिठाइयों और पनीर के नमूने लेने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सस्ती बाहरी मिठाइयों की बढ़ती बिक्री से स्थानीय दूध उत्पादकों और पशुपालकों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुरसेला के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमरलाल ने बताया कि मिलावटी मिठाई और पनीर के सेवन से फूड प्वॉयजनिंग, डायरिया, उल्टी और पेट संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने लोगों को मिठाई खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही बाजार में खाद्य पदार्थों की नियमित जांच को जरूरी बताया।


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