बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सकारात्मक सोच और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी- राज्यपाल
- by Manjesh Kumar
- 01-Oct-2026
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पटना: राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य की प्रतिभा, क्षमता और युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देकर उच्च शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को सकारात्मक सोच, बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई के साथ मिलकर काम करना होगा। बिहार लोक भवन में आयोजित ‘बिहार में उच्च शिक्षा का रूपांतरण’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर बनी नकारात्मक धारणा को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश होती है और चुनौतियों की पहचान कर प्रभावी ढंग से काम करने से उच्च शिक्षा में निरंतर सुधार संभव है। उन्होंने बिहार की प्रतिभा, उपलब्धियों और सकारात्मक प्रयासों को व्यापक स्तर पर सामने लाने तथा देश-दुनिया तक पहुँचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं और उनकी सफलता की कहानियों को सामने लाना आवश्यक है।
राज्यपाल ने नई पीढ़ी की अपेक्षाओं को समझने, विद्यार्थियों की बात सुनने और उनके साथ निरंतर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने शैक्षणिक कैलेंडर को व्यवस्थित करने तथा लंबित परीक्षाओं के ससमय आयोजन और परिणामों को समय पर प्रकाशित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्णयों में देरी और स्पष्टता के अभाव से विद्यार्थियों में निराशा पैदा होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। छात्रावास, मेस, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, सड़क, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। महिला विद्यार्थियों की सुरक्षा और विश्वविद्यालय परिसरों में लैंगिक संवेदनशीलता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
राज्यपाल ने कुलपतियों, विभागाध्यक्षों और शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद बढ़ाने को कहा। उन्होंने उच्च शिक्षा के डिजिटलीकरण और ‘समर्थ’ प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आवश्यक मानव संसाधन विकसित करने पर जोर दिया। विद्यार्थियों की शिकायतों और सुझावों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी फीडबैक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने शिक्षक विकास कार्यक्रमों, खेल गतिविधियों और व्यवस्थित खेल कैलेंडर को बढ़ावा देने तथा पुस्तकालयों को रात 10 बजे तक खोलने, पर्याप्त एवं अद्यतन पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। यूएमआईएस से ‘समर्थ’ में आँकड़ों के स्थानांतरण के दौरान आंकड़ों की सुरक्षा और भुगतान संबंधी मामलों में सावधानी बरतने की बात कही। साथ ही, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर बल दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने वाइस चांसलर्स हैंडबुक और यूजीसी रेगुलेशन्स के कम्पेंडियम का विमोचन भी किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाईगर ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों का लाभ शिक्षा व्यवस्था को मिलना चाहिए। उन्होंने बिहार की मानव पूंजी, प्रतिभा और युवाओं को बेहतर अवसर देने पर जोर दिया। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना तथा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं अन्य पदाधिकारियों को नियमों, विनियमों और नवाचारों से अवगत कराना है। तकनीकी सत्रों में विश्वविद्यालयों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। वित्त विभाग के संयुक्त आयुक्त श्री अजय ठाकुर ने बजट, निविदा, खरीद प्रक्रिया और विश्वविद्यालयों में वित्तीय प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव श्री सतीश तिवारी ने विश्वविद्यालय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन पर प्रकाश डाला।
उच्च शिक्षा निदेशक प्रो एनके अग्रवाल ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मान्यता की प्रक्रिया की जानकारी दी। राज्यपाल के सलाहकार प्रो बीके त्रिपाठी और शिक्षा मंत्रालय के निदेशक डीके शर्मा ने शिक्षक विकास कार्यक्रमों की पृष्ठभूमि, उनकी उपयोगिता और बिहार के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में उनके क्रियान्वयन पर चर्चा की। सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क सेवाओं, ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ योजना और ई-पुस्तकालय से जुड़े सत्र में सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क के डॉ अभिषेक और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ डीके सिंह ने डिजिटल पुस्तकालय संसाधनों के प्रभावी उपयोग और उनके क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में प्रतिदिन लगभग 8,000 लोग आते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो रत्नावली ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालयों की अल्पकालिक और दीर्घकालिक विकास योजनाओं तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में उद्योग और शिक्षा जगत के बीच बेहतर तालमेल तथा डिजिटल शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। बीओपीटी के निदेशक डॉ एसएम एजाज अहमद ने राष्ट्रीय प्रशिक्षु प्रशिक्षण योजना के माध्यम से उपलब्ध अप्रेंटिशशिप के अवसरों की जानकारी दी। शैक्षिक संसाधन संघ के निदेशक प्रो. परीक्षित सिंह मानस ने पाठ्यक्रम में ‘स्वयं’ के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन बिहार लोक भवन में विशेष कार्य पदाधिकारी, अकादमिक, डॉ गौरव सिक्का ने किया। कार्यशाला में राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी, वित्तीय सलाहकार, अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राचार्य, विशेषज्ञ तथा राज्यपाल सचिवालय के अधिकारी उपस्थित थे।


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