देश के 18 शहरों में अब पानी में चलेगी मेट्रो, साकार होगा वाटर मेट्रो मैन का सपना
- by Manjesh Kumar
- 07-Jul-2026
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अप्रैल 2023 में कोच्चि में शुरू हुई थी पहली वाटर मेट्रो सेवा। पूर्व बहुचर्चित आईपीएस अधिकारी व कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक लोकनाथ बेहरा की पहल का असर। लोकनाइ बेहरा को "एक्वा मैन ऑफ इंडिया" तथा "वाटर मेट्रो मैन ऑफ इंडिया" के रूप में मिली है पहचान
पटना: वह दिन दूर नहीं जब मेट्रो सेवा का लुत्फ आप पटना, अयोध्या, वाराणसी, प्रयाग में गंगा की लहरों के साथ श्रीनगर के डल झील पर भी उठा सकते हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए संभावनाओं की तलाश तेज कर दी है और शुरूआत में देश भर के 18 शहरों को इस वाटर मेट्रो सेवा के लिए उपर्युक्त माना गया है। अभी वाटर मेट्रो सेवा केरलम के कोच्चि में संचालित किया जा रहा है। जिसका श्रेय कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक लोकनाथ बेहरा और उनकी टीम को जाता है। जिनकी पहल से कोच्चि में यह सेवा अप्रैल 2023 से शुरू हो पाई और यही वजह है कि उन्हें "एक्वा मैन ऑफ इंडिया" तथा "वाटर मेट्रो मैन ऑफ इंडिया" के नाम से पहचान मिली। क्योंकि, भारत में जहां दशकों तक सड़क, रेल और हवाई परिवहन को ही विकास का प्रमुख आधार माना जाता रहा, वहीं लोकनाथ बेहरा ने यह सोच विकसित की कि देश की विशाल नदियां, झीलें, बैकवाटर्स और अंतर्देशीय जलमार्ग केवल प्राकृतिक संसाधन या पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के प्रभावी माध्यम भी बन सकते हैं। इसी सोच ने भारत की पहली एकीकृत कोच्चि वाटर मेट्रो परियोजना को जन्म दिया।
आपको बता दें कि लोकनाथ बेहरा 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और 2009 में गठित हुई एनआईए के संस्थापक सदस्य में एक रहे हैं। यही नहीं साल 2008 में हुए मुंबई ब्लास्ट के मास्टर माइंड आतंकी डेविड हेडली को पकड़ने अमेरिका जाने वाली टीम के भी हिस्सा रह चुके हैं। साल 2001 से वह कोच्चि मेट्रो के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं। बिहार के पटना में यह सेवा दीघा घाट से पटना सिटी के कंगन घाट तक चलाई जाएगी। बीच में इसके प्रमुख स्टॉपेज गांधी घाट और गाय घाट होंगे। इसका शुरुआती किराया लगभग ₹20 के करीब तय किए जाने की योजना है। दूसरे चरण में इसका विस्तार दानापुर और सोनपुर (हरिहरनाथ) तक किया जाएगा।
एक बार में 75 यात्री कर सकते हैं सफर
यह अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक जहाज 42 मीटर लंबा और वातानुकूलित (AC) है, जिसमें 50 यात्रियों के बैठने और 25 यात्रियों के खड़े होने (कुल 75 लोग) की क्षमता है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, एलसीडी स्क्रीन, साउंड सिस्टम और बड़ी कांच की खिड़कियां लगाई गई हैं, ताकि यात्री आराम से गंगा और घाटों का नजारा देख सकें।
कोच्चि से शुरू हुई नई परिवहन क्रांति
लोकनाथ बेहरा के नेतृत्व में विकसित कोच्चि वाटर मेट्रो पारंपरिक फेरी सेवा नहीं, बल्कि आधुनिक, तकनीक-आधारित और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के रूप में तैयार की गई। इसमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक नौकाएं, आधुनिक टर्मिनल, डिजिटल टिकटिंग, एकीकृत यात्री सेवाएं तथा मेट्रो रेल एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के साथ समन्वित संचालन की व्यवस्था विकसित की गई। इस परियोजना ने न केवल सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक का विकल्प प्रस्तुत किया, बल्कि द्वीपों और जल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को शहर की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी यात्रा को आसान, सस्ती और सुरक्षित बनाया। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी, ईंधन की बचत तथा पर्यावरण संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
कोच्चि वाटर मेट्रो की सफलता ने देश-विदेश के नीति निर्माताओं, शहरी परिवहन विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का ध्यान आकर्षित किया। लाखों यात्रियों ने इस सेवा का लाभ उठाया और इसे आधुनिक, आरामदायक तथा विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में सराहा। आज अनेक सरकारी प्रतिनिधिमंडल और विशेषज्ञ दल कोच्चि पहुंचकर इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि इसे अपने-अपने राज्यों और शहरों में लागू किया जा सके।
कई राज्यों में तैयार हो रहा वाटर मेट्रो का रोडमैप
कोच्चि मॉडल की सफलता के बाद देश के कई राज्यों में वाटर मेट्रो की संभावनाओं का अध्ययन शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम के डिब्रूगढ़ और तेजपुर। श्रीनगर के डल झील, उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और बिहार के पटना के गंगा में चलाने की तैयारी है। पटना के गंगा में इसे घाट और शहरा आवागमन के लिए चलाने की योजना है। वहीं वाराणसी में घाट, पर्यटन क्षेत्र, व्यस्त नदी तट क्षेत्र, अयोध्या में मंदिर पर्यटन क्षेत्र और प्रयागराज में इसे संगम क्षेत्र और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र में चलाने की योजना पर काम चल रहा है।
प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार ने भी सराहा मॉडल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2023 में कोच्चि वाटर मेट्रो को राष्ट्र को समर्पित करते हुए इसे देश के हरित और बहु-माध्यमीय परिवहन तंत्र की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया था। वहीं जहाजरानी मंत्री सर्वानंद सोनवाल ने भी विभिन्न राज्यों में इस मॉडल को अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए इसे देश के अंतर्देशीय जलमार्ग विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इसके अलावा असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वशर्मा ने असम के गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ और तेजपुर जैसे शहरों में वाटर मेट्रो की संभावनाओं की सार्वजनिक रूप से सराहना की है।
एकीकृत परिवहन प्रणाली पर विशेष जोर
लोकनाथ बेहरा का मानना है कि भविष्य का सार्वजनिक परिवहन केवल एक माध्यम पर आधारित नहीं हो सकता। उनके अनुसार मेट्रो रेल, बस सेवा, जलमार्ग, पैदल यात्री सुविधाएं और साझा टिकटिंग प्रणाली को एकीकृत कर ही प्रभावी, किफायती और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इसी सोच के आधार पर कोच्चि वाटर मेट्रो को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित किया गया, जो आज देश की प्रस्तावित राष्ट्रीय वाटर मेट्रो नीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ मॉडल बन चुका है।
नई अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर वाटर मेट्रो नेटवर्क विकसित होता है तो इससे इलेक्ट्रिक नौका निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक टर्मिनल, परियोजना प्रबंधन, जलमार्ग इंजीनियरिंग, पर्यावरण संरक्षण और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
भारत के जल परिवहन की नई पहचान
विश्लेषकों के अनुसार लोकनाथ बेहरा की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल कोच्चि वाटर मेट्रो का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सोच को बदलना है। उन्होंने नदियों और बैकवाटर्स को पर्यटन तक सीमित रखने की बजाय उन्हें आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित किया है। आज जब भारत स्वच्छ, स्मार्ट और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब कोच्चि वाटर मेट्रो एक राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरी है। इस परिवर्तनकारी पहल के पीछे लोकनाथ बेहरा की दूरदृष्टि, प्रशासनिक क्षमता और नवाचारपूर्ण नेतृत्व को देखते हुए उन्हें "भारत के एक्वा मैन" तथा "वाटर मेट्रो मैन ऑफ इंडिया" के रूप में व्यापक पहचान मिल रही है। यदि आने वाले वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में वाटर मेट्रो परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो भारतीय शहरी परिवहन के इतिहास में लोकनाथ बेहरा का नाम उस दूरदर्शी नेतृत्व के रूप में दर्ज होगा, जिसने जलमार्गों को विकास, कनेक्टिविटी और हरित भविष्य का नया माध्यम बनाया।


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