ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने ईरान जाएंगे बिहार के राज्यपाल, साथ होंगे विदेश राज्य मंत्री
- by Manjesh Kumar
- 29-Jun-2026
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नई दिल्ली: पूर्व मध्य एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब ईरान ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया है। इस समारोह में भारत की तरफ से भी एक प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेने जाएंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में बिहार के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन तथा विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गरेटा शामिल होंगे। यह फैसला ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए आधिकारिक निमंत्रण के बाद लिया गया है। जानकारी के अनुसार, भारतीय प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में स्वयं शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री की जगह अपने अनुभवी चेहरों को इसकी जिम्मेदारी दी है। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन सैन्य मामलों के साथ-साथ मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) और आतंकवाद विरोधी मामलों के बड़े रणनीतिक विशेषज्ञ माने जाते हैं वहीं पबित्र मार्गेरिटा विदेश राज्य मंत्री के रूप में भारत की कूटनीतिक प्रतिबद्धता का सीधा प्रतिनिधित्व करेंगे। ईरान के करीब चार दशकों के इतिहास को आकार देने वाले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की मौत इसी साल 28 फरवरी को पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरुआती चरण के दौरान तेहरान में एक संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में हो गई थी युद्ध की विभीषिका के कारण उनके अंतिम संस्कार को स्थगित कर दिया गया था, जो अब युद्धविराम लागू होने के बाद आयोजित किया जा रहा है। 4 जुलाई से शुरू होने वाले इस विदाई समारोह के दौरान उनके पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, इसके बाद तेहरान और पवित्र शहर कोम में विशाल सार्वजनिक जुलूस निकाले जाएंगे, और अंततः 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में स्थित प्रसिद्ध इमाम रज़ा दरगाह में उन्हें दफनाया जाएगा।
ईरान के प्रति भारत का यह कूटनीतिक झुकाव दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है, जिसके तहत भारत ईरान को अपने ‘विस्तारित पड़ोस’ का अहम हिस्सा मानता है। खामेनेई की मौत के ठीक बाद भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे। पूरे 40 दिनों के क्षेत्रीय तनाव के दौरान भी पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में रहे थे। हाल ही में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी नई दिल्ली का दौरा कर ब्रिक्स बैठकों के इतर एस जयशंकर और पीएम मोदी से मुलाकात की थी।


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