पूर्णिया का यह जर्जर पुल लगातार दे रहा हादसों को आमंत्रण, ग्रामीण की शिकायत के बावजूद प्रशासन कर रहा नजरअंदाज

पूर्णिया: पूर्णिया के जानकीनगर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 15 के महराजी गांव स्थित क्षतिग्रस्त व जर्जर लोहा पुल हादसे को दावत दे रहा है, जहां कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती हैं। सालों से यह लोहा पुल जर्जर है। इस पर किसी की नजर नहीं है। जिन्हें इसकी जिम्मेदारी सौंप गई है उन्हें कोई मतलब नहीं है और स्थानीय जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। जानकीनगर से बनमनखी जाने के लिए शॉर्टकट रास्ता महराजी पुल होकर ही जाता है, क्योंकि पूर्णिया सहरसा एनएच 107 होकर जाने पर एक तो दूरी भी अधिक होती है और एनएच 107 होकर बड़े-बड़े वाहन भी चलते हैं जिस कारण आने जाने में परेशानी होती है।

इसे देखते हुए जानकीनगर क्षेत्र के आसपास के कई पंचायत के व्यक्ति खास तौर पर जानकीनगर से जब बनमनखी जाते हैं तो वह महराजी पुल होकर जिवछपुर होते हुए बनमनखी जाते हैं। इस रास्ते होकर जानकीनगर और बनमनखी की दूरी भी कम तय करनी पड़ती है। लोग बगैर बिना जाम के आराम से बनमनखी पहुंच जाते हैं। लेकिन महराजी गांव में धार में बना लोहा का पुल काफी जर्जर हो गया है। महराजी गांव के स्थानीय ग्रामीण अनिल कुमार मेहरा ने कहा कि जानकीनगर और बनमनखी को जोड़ने वाली सड़क में महराजी गांव के पास धार में बना लोहा पुल पर होकर बड़े वाहनों के आवाजाही से किसी भी समय यह टूटकर गिर सकता है। टूटे पुल पर न तो जनप्रतिनिधि ध्यान  दे रहे हैं और न प्रशासन। स्थानीय निवासी क्षतिग्रस्त लोहा पुल की जगह नया पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। समय रहते ऐसा नहीं हुआ तो कभी भी बड़ी घटना हो सकती हैं। अनुमंडल एवं जिला प्रशासन बेखबर है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बड़े वाहनों की आवाजाही से पुल हिलता था। जिसके कारण वर्षों से लोडिंग माल वाहक वाहन इधर से नहीं गुजरता है।

जानकीनगर और बनमनखी को जोड़ने वाली यह एक महत्वपूर्ण सड़क है। इस लोहा पुल पर बना एप्रोच पथ के नीचे का लोहा जंग लगने से टूटने लगा है पुल के दोनों तरफ एप्रोच पथ पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। लोहा पुल पर लगा चदरा भी धीरे धीरे उखड़ रहा है। लोगों ने यह भी बताया कि पूर्णिया सहरसा एनएच 107 मुख्य पक्की सड़क से जानकीनगर से बनमनखी जाने के लिए 12 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ता है जबकि जानकीनगर से बनमनखी जाने के लिए महराजी गांव लोहा पुल होकर जिवछपुर के रास्ते महज 9 किलो मीटर का सफर करना पड़ता है पूरे तीन किलोमीटर कम चलना होता है। अब देखना है कि इस क्षतिग्रस्त पुल पर किसकी नजरें इनायत होती है या फिर सब कुछ भगवान भरोसे चलता रहेगा।

  

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