जमीन मापी को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद, दोनों ने एक दूसरे पर लगाया आरोप
- by Manjesh Kumar
- 23-Jul-2026
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कटिहार: कटिहार के बरारी प्रखंड के कान्तनगर पंचायत अंतर्गत सिमराहा गांव (वार्ड संख्या-4) में गुरुवार को भूमि विवाद को लेकर मापी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। एक पक्ष ने बिना पूर्व सूचना के भूमि की नापी कराए जाने का आरोप लगाते हुए अमीन और उनके साथ पहुंचे कर्मियों का विरोध किया। बढ़ते विरोध को देखते हुए मापी की कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी। प्रथम पक्ष के अब्दुल रज्जाक, जमालुद्दीन, मो नौसाद, मो हासेन और मो मकसूद ने बताया कि वर्ष 1990 में उन्होंने खाता संख्या-29 के खेसरा संख्या-1659 में 66 डिसमिल तथा खेसरा संख्या-1658 में 9 डिसमिल भूमि की खरीद की थी। उनका कहना है कि वर्षों तक इस जमीन की विधिवत पैमाइश नहीं हुई।
उनके अनुसार, गांव के मो मंजूर आलम ने भी इसी खाता के खेसरा संख्या-1658 में 59 डिसमिल भूमि खरीदी थी। वर्ष 2022 में कराई गई पैमाइश के दौरान करीब 8 डिसमिल भूमि कम पाई गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पंचायत हुई, जिसमें कथित रूप से यह सहमति बनी कि भूमि की कमी या अधिकता का असर दोनों पक्ष समान रूप से स्वीकार करेंगे। प्रथम पक्ष का आरोप है कि पंचायत के निर्णय पर दूसरे पक्ष ने हस्ताक्षर भी किए थे, लेकिन बाद में अपने रुख से पलटते हुए अतिरिक्त जमीन की मांग शुरू कर दी। मामला जनता दरबार तक पहुंचा, जहां पहले से हुए पंचायत निर्णय का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया गया।
अब्दुल रज्जाक का कहना है कि पंचायत के निर्णय के अनुसार कुल 8 डिसमिल भूमि की कमी में उनके हिस्से में 5 डिसमिल और दूसरे पक्ष के हिस्से में 3 डिसमिल की कमी तय हुई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया। इसके बावजूद दूसरा पक्ष बार-बार सरकारी एवं निजी अमीन के माध्यम से नई पैमाइश कराने का प्रयास कर रहा है। गुरुवार को जब अमीन नापी के लिए पहुंचे तो प्रथम पक्ष ने पूर्व सूचना नहीं मिलने का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज कराई। उनका आरोप है कि इस दौरान अमीन ने मापी में बाधा डालने पर कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने की चेतावनी दी। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और नापी की प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। प्रथम पक्ष का दावा है कि इस विवाद पर अब तक तीन बार पंचायत हो चुकी है। अंचल कार्यालय के अमीन पहले ही भूमि की पैमाइश कर अपनी रिपोर्ट अंचल कार्यालय में जमा कर चुके हैं। साथ ही संबंधित भूमि का दाखिल-खारिज भी उनके नाम पर होने का दावा किया गया है।


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