मुजफ्फरपुर DM का बड़ा एक्शन : मीनापुर सीडीपीओ पर कारवाई, अनियमितता और लापरवाही के विरुद्ध..


मुज़फ्फरपुर : जिले में संचालित विकासात्मक एवं कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं ईमानदार क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में मीनापुर बाल विकास परियोजना कार्यालय से जुड़े एक गंभीर मामले में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने त्वरित एवं कठोर कार्रवाई करते हुए महिला पर्यवेक्षिका अर्चना कुमारी को तत्काल प्रभाव से नियोजन मुक्त कर दिया है। यह कार्रवाई अवैध राशि की मांग, सरकारी कार्यों में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता तथा अत्यंत खराब कार्य निष्पादन के आरोपों के सत्यापन के उपरांत की गई है.


बाल विकास परियोजना कार्यालय, मीनापुर की महिला पर्यवेक्षिका द्वारा एक व्यक्ति से सरकारी कार्य के निष्पादन के एवज में अवैध राशि की मांग किए जाने से संबंधित एक ऑडियो क्लिप सामने आई थी। इस ऑडियो क्लिप को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की विधिवत जांच कराई गई। जांच के दौरान यह तथ्य स्पष्ट रूप से सत्यापित हुआ कि उक्त ऑडियो क्लिप में अवैध राशि की मांग महिला पर्यवेक्षिका अर्चना कुमारी द्वारा ही की गई थी। जांच रिपोर्ट में इस कृत्य को स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी, अनैतिक एवं सरकारी सेवा नियमों का घोर उल्लंघन बताया गया.


जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के पश्चात जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने इस कृत्य को गंभीर कदाचार की श्रेणी में मानते हुए महिला पर्यवेक्षिका को तत्काल प्रभाव से नियोजन मुक्त करने का आदेश दिया. जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं से जुड़ा कोई भी कर्मी यदि  अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाएगी.


इसके अतिरिक्त दिसंबर 2025 माह की विभागीय प्रगति की समीक्षा में भी मीनापुर बाल विकास परियोजना कार्यालय का समग्र प्रदर्शन अत्यंत असंतोषजनक पाया गया.

समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि परियोजना के लगभग सभी प्रमुख सूचकांकों पर जिले के औसत स्तर से भी काफी पीछे रही। महिला पर्यवेक्षिका द्वारा टीएचआर (टेक होम राशन) वितरण एवं गर्म भोजन योजना से संबंधित पोषण ट्रैकर में की गई प्रविष्टियाँ अपेक्षित स्तर से काफी कम पाई गईं। साथ ही फर्स (FARs) से संबंधित प्रविष्टियाँ भी अपार आईडी की औसत प्रगति से कम दर्ज की गईं, जो कार्य निष्पादन में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है.


नियमित टीकाकरण के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक पाई गई। दो सेक्टरों में नियमित टीकाकरण की प्रविष्टियाँ अत्यंत असंतोषजनक रहीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी समुचित ढंग से नहीं की जा रही थी। किशोरी बालिकाओं के वजन एवं लंबाई से संबंधित प्रविष्टियों की समीक्षा में यह भी सामने आया कि इस दिशा में प्रगति शून्य रही, जो भविष्य में किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.


इसके अलावा पांच वर्ष तक के बच्चों की वृद्धि निगरानी की स्थिति भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाई गई। तीनों सेक्टरों में बच्चों की वृद्धि निगरानी की औसत प्रगति मात्र 83 प्रतिशत से भी कम रही, जबकि यह कार्यक्रम बाल स्वास्थ्य एवं पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। निरीक्षण कार्यों में भी गंभीर खामियां उजागर हुईं। सेक्टर-3 में मात्र 8 आंगनबाड़ी केंद्रों तथा सेक्टर-13 में केवल 11 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जो निर्धारित मानकों एवं विभागीय निर्देशों के अनुरूप नहीं है.


इन सभी तथ्यों, जांच निष्कर्षों एवं समीक्षा रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने महिला पर्यवेक्षिका अर्चना कुमारी को नियोजन मुक्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता, अथवा अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.


साथ ही मीनापुर के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के विरुद्ध भी लगातार शिकायतें प्राप्त होने, विभागीय कार्यों के निष्पादन में खराब प्रदर्शन तथा सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोप सामने आये है. जिलाधिकारी ने इन मामलों को समाज कल्याण विभाग को अवगत कराते हुए बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मीनापुर को निलंबित करने तथा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने की अनुशंसा की है.


ज्ञातव्य हो कि इनके द्वारा आंगनबाड़ी सेविकाओं से अवैध राशि की वसूली के संबंध में लगातार शिकायत प्राप्त होने तथा आंगनबाड़ी सेविकाओं की धरना प्रदर्शन से संबंधित मामलों की जांच अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी से कराई गई। उनके द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मीनापुर राजेश कुमार सिंह के द्वारा पर्ची निर्गत करने के उपरांत बिहार राज्य खाद्य निगम के गोदाम से चावल आपूर्ति की जाती है जबकि पर्ची निर्गत करने संबंधी कोई विभागीय प्रावधान परिचारित नहीं है‌। माह दिसंबर 2025 में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मीनापुर द्वारा कुल 511 आंगनबाड़ी केदो के विरुद्ध मात्र 8 आंगनबाड़ी केदो का निरीक्षण किया गया जो विभागीय दिशा निर्देश के अनुरूप काफी कम है। इसके अलावा जिला स्तरीय समीक्षा के क्रम में इन्हें लगातार निर्देशित किए जाने के बावजूद बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मीनापुर द्वारा सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण में लगातार लापरवाही एवं उदासीनता बरती गई है। उनके पदभार ग्रहण करने से लेकर दिसंबर 2025 तक पोषण ट्रैकर के विभिन्न सूचकांकों यथा जीरो से 5 वर्ष के बच्चों का वृद्धि निगरानी आभा आईडी, पीएचआर वितरण, परवरिश योजना के तहत आवेदन का सृजन एवं बच्चों के अपार आईडी निर्माण में जिले के औसत उपलब्धि से भी काफी कम उपलब्धि प्राप्त की गई है। जिलाधिकारी ने  इस प्रकार की गंभीर लापरवाही को समाज कल्याण विभाग के सचिव को अवगत कराते हुए उनसे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मीनापुर श्री राजेश कुमार सिंह को निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने की अनुशंसा की है।


उल्लेखनीय है कि 15 अक्टूबर 2025 को आंगनबाड़ी केंद्र हेतु SIO जारी हुई थी जिसकी उपलब्धता 30 अक्टूबर तक आंगनबाड़ी केदो को सुनिश्चित की जानी थी लेकिन निरीक्षण की तिथि तक 100 से अधिक आंगनबाड़ी केदो को उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही सहायक गोदाम प्रबंधक मीनापुर द्वारा निरीक्षण की तिथि तक भंडार निर्गमनादेश के अनुसार 214.70 क्विंटल खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया गया।

 इसे गंभीर मानते हुए अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी द्वारा भी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मीनापुर एवं सहायक गोदाम प्रबंधक मीनापुर से स्पष्टीकरण की गई थी।


इस पूरे प्रकरण पर जिलाधिकारी ने जिले के सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सभी सरकारी कार्यों का निष्पादन पूर्ण जवाबदेही, ईमानदारी, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी भी स्तर पर कार्य में कोताही, लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


जिलाधिकारी की कठोर एवं क्विक एक्शन से स्पष्ट होता है कि आम जनता से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि है तथा सरकारी तंत्र में किसी भी प्रकार की अनियमितता  को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.


मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट...

  

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