अब हर महादलित टोले में बहेगा पानी, मंत्री ने तय की तीन महीने की डेडलाइन

पीएचईडी मंत्री ने सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में दी यह जानकारी। किसी तरह की शिकायत आने पर 24 घंटे के अंदर होगा इसका समाधान  

पटना: आने वाले तीन महीने में राज्य के सभी छूटे हुए महादलित टोलों में नल का जल पहुंच जाएगा। इसे लेकर पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) के स्तर पर कवायद तेज कर दी गई है। यह जानकारी पीएचईडी मंत्री श्री संजय कुमार सिंह ने सूचना भवन के सभागार में बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि 2016 में 2.66 लाख परिवारों तक नल का जल पहुंचाया गया था। यह संख्या 2026 में बढ़कर 1 करोड़ 87 लाख से अधिक हो गई है। विभाग का लक्ष्य 2 करोड़ 2 लाख परिवारों तक पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है। बचे हुए 15 लाख परिवारों तक भी जल्द ही नल का जल पहुंचा दिया जाएगा। मौजूदा समय में राज्य के 93 फीसदी परिवार इस योजना के लाभ से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग से संबंधित किसी तरह की शिकायत या समस्या के समाधान के लिए प्रधान सचिव का मोबाइल नंबर 9473191466 जारी किया गया है। 

भूजल स्तर में हुई बढ़ोतरी

विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य में 2019 की तुलना में 2026 राज्य के भूजल स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य की 50 फीट या इससे नीचे के भूजल स्तर वाली पंचायतों की संख्या 2019 में 138, जो 2026 में घटकर 19 हो गई। इसमें 66 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसी तरह उन पंचायतों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है, जिनका भूजल स्तर 40-50 फीट के बीच है। ऐसी पंचायतों की संख्या इस समयावधि में घटकर 1270 से 1158 हो गई। इसी तरह 20-30 फीट भूजल स्तर वाली पंचायतों की संख्या भी कम होकर 2529 से 2213 हो गई हैं। भूजल स्तर में बढ़ोतरी के कई कारण बताए जा रहे हैं। परंतु इसके प्रमुख कारणों में जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन, लोगों में जागरुकता समेत ऐसे कारण प्रमुख हैं। 

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्तर पर भीषण गर्मी को देखते हुए आपदा प्रबंधन कमेटी की बैठक में नल से जल की सप्लाइ के समय में एक घंटे की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी पूरे वर्ष के लिए लागू रहेगी। अक्टूबर से मार्च के बीच सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और अप्रैल से सितंबर के बीच सुबह 5 बजे से 9 बजे तक पानी का सप्लाई किया जाएगा। इसके अलावा वर्षभर शाम को पानी की सप्लाई अभी संध्या 4 से 6 बजे तक होती थी। इसकी समयसीमा में तब्दील करते हुए शाम 4 बजे से 7 बजे तक कर दी गई है।

86 हजार चापाकलों की हो रही मरम्मति

मंत्री ने कहा कि राज्य में हीटवेव को देखते हुए खास प्लान तैयार किए गए हैं। 475 वाटर टैंकर, 15 वाटर एटीएम और 15 जलदूत की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बंद पड़े 86 हजार चापाकलों को ठीक करने का अभियान पूरे राज्य में तेजी से चलाया जा रहा है। दक्षिण बिहार में आपदा प्रबंधन विभाग से मिली राशि के आधार पर 1 हजार नए चापाकलों को गाढ़ दिया गया है। सालाना औसतन 5 हजार चापाकल पूरे राज्य में लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पीएचईडी के स्तर से खराब काम करने वाले ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की जा रही है। अब तक 468 ठेकेदारों को डीबार और 25 को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग से 87 हजार 160 योजनाएं ट्रांसफर होकर पीएचईडी को मिली हैं। इनमें कई योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। इसे भी ठीक करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

प्रदूषित जल के लिए चलाई जा रही खास योजना

विभागीय सचिव राजेश कुमार ने कहा कि जिन इलाकों के भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन तत्वों के कारण प्रदूषण है, इन क्षेत्रों के लिए सतही जल आधारित बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं संचालित करना विभाग की प्राथमिकता में है। विभिन्न जिलों में गंगा, सोन और सुरसर नदी को स्रोत बनाकर बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण किया गया है। भागलपुर, वैशाली, बक्सर, बेगूसराय, भोजपुर, नवादा, नालंदा समेत अन्य जिलों में संचालित योजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे जुड़ी 14 योजनाएं पूर्ण होकर चालू हो गई हैं, दो निर्माणाधीन हैं। दो अन्य योजनाओं का सर्वेक्षण विभाग के स्तर से कराया जा चुका है। इसके अलावा सुपौल, कैमूर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत अन्य कई जिलों के लिए नई बहुग्रामीण योजनाओं का प्रस्ताव भारत सरकार को जल-जीवन मिशन के अंतर्गत भेजा गया है। इनके पूर्ण होने पर हजारों गांवों के लोगों को सतही जल आधारित सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। वहीं, जल की गुणवत्ता की जांच करने के लिए 75 अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इस प्रेस वार्ता के दौरान इंजीनियर इन चीफ नित्यानंद प्रसाद समेत अन्य मौजूद थे।

  

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