प्रयोगशाला कौशल से उद्यमिता तक: प्रयोगशाला कौशल एवं उद्यमिता पर चार दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण सम्पन्न

पटना: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर में 21 अगस्त को चार दिवसीय “प्रयोगशाला कौशल एवं उद्यमिता: मृदा, पशु एवं मानव स्वास्थ्य के लिए वन हेल्थ दृष्टिकोण” विषयक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। 18 से 21 अगस्त तक आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रयोगशाला कौशल, आधुनिक नैदानिक तकनीकों तथा उद्यमिता के अवसरों से परिचित कराना था। प्रशिक्षण में वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाते हुए मृदा, पर्यावरण, पशु एवं मानव स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर जोर दिया गया। विद्यार्थियों को मृदा विश्लेषण, सूक्ष्मजीवी तकनीक, बैक्टीरियल कल्चर, एलिसा, न्यूक्लिक एसिड पृथक्करण, पीसीआर, जैल इलेक्ट्रोफोरेसिस तथा रियल-टाइम पीसीआर जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा, विद्यार्थियों को बायोइन्फॉर्मेटिक्स तथा मानव नैदानिक प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया। उन्होंने खेत का भ्रमण कर प्रयोगशाला तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को भी समझा।

प्रशिक्षण में छह संस्थानों के कुल 16 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान, औषधि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी विषयों के स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थी शामिल थे। प्रतिभागियों में 50 प्रतिशत छात्राएं थीं। संस्थान के निदेशक डॉ अनुप दास ने प्रतिभागियों को बधाई देते हुए प्रशिक्षण के व्यावहारिक स्वरूप की सराहना की। उन्होंने युवाओं को देश की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल, आत्मविश्वास और जिज्ञासा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने व्यावहारिक प्रयोगशाला कौशल के महत्व पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, अपने ज्ञान को अद्यतन करने तथा वैज्ञानिक कौशल का वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. दास ने कहा कि वैज्ञानिक कौशल को रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने वन हेल्थ की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के आपसी संबंध को रेखांकित किया। 

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक प्रयोगशाला उद्यमिता था, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को पारंपरिक रोजगार के विकल्पों से आगे बढ़कर प्रयोगशाला आधारित सेवाओं एवं उद्यमिता के अवसरों की तलाश के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस प्रकार प्रशिक्षण में वन हेल्थ, व्यावहारिक कौशल विकास, युवा सशक्तीकरण और उद्यमिता के प्रमुख तत्वों को एक साथ जोड़ा गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के विभिन्न प्रभागों के प्रमुख, वैज्ञानिक एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

  

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