भारत विभाजन की विभीषिका को याद रखना जरूरी, राष्ट्र रहेगा, तभी हम सब रहेंगे, राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि : मुख्यमंत्री
- by Manjesh Kumar
- 14-Aug-2026
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पटना: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को अधिवेशन भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने भारत विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, नमन किया तथा विभाजन की त्रासदी झेलने वाले पीड़ितों एवं विस्थापित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान दो मिनट का मौन रखा गया। भारत विभाजन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखायी गयी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विभाजन मानवता की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था। विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपने घर-बार छोड़ने पड़े और उन्हें अपूरणीय पीड़ा एवं कष्ट झेलना पड़ा। यह दिन उन सभी लोगों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने उस कठिन दौर में अपने प्राणों की आहूति दी तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। 79 वर्ष पहले का वह दृश्य कैसा मार्मिक होगा, जिसमें देश का विभाजन हुआ था और लोग बिछड़ रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी का आभार व्यक्त करते हैं कि वर्ष 2021 से उन्होंने आज के दिन को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। विभाजन की विभीषिका को याद रखना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की सच्चाई से अवगत कराना भी है। युवाओं और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष, त्याग एवं उस दौर की घटनाओं से परिचित कराना आवश्यक है ताकि वे इतिहास से सीख लेकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को और मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घर, जमीन-जायदाद और संपत्ति छोड़कर नए स्थानों पर जीवन की शुरुआत की। कठिन परिस्थितियों में समाज के विभिन्न वर्गों ने एक-दूसरे की सहायता की और पीड़ितों एवं विस्थापितों को सहारा दिया। यह मानवीय संवेदना और सहयोग की भावना हमारी सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरदार बल्लभ भाई पटेल ने 567 रियासतों को एक साथ जोड़ा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने चम्पारण से सत्याग्रह शुरू कर देश को आजादी दिलायी। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने अखंड भारत का संकल्प किया। डॉ राजेन्द्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ने लोकतंत्र को मजबूत किया। हमारी सभ्यता और संस्कृति गौरवशाली है। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिये सभी को मिलकर काम करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास हमें यह सीख देता है कि समाज में आपसी भाईचारा, सद्भाव और एकता जितनी मजबूत होगी, राष्ट्र उतना ही सशक्त होगा। राष्ट्र रहेगा, तभी हम सब रहेंगे। राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि होनी चाहिये। हमें अतीत की पीड़ा से सीख लेते हुए ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए सामाजिक एकता और परस्पर विश्वास को निरंतर मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें विभाजन की त्रासदी को स्मरण करते हुए राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की विभीषिका में जिन लोगों ने अपने प्राण गवाएं और जिन परिवारों ने असहनीय पीड़ा झेली, उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम एकजुट होकर देश और समाज को मजबूत बनाएं। आज के स्मृति दिवस पर सभी वीर सपूतों को नमन करते हैं, जिन्होंने हमें आजादी दिलायी। विभाजन विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले पूर्वजों को भी नमन करते हैं और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
कार्यक्रम को विधायक संजीव चौरसिया तथा कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक रत्नेश कुशवाहा, विधान पार्षद अनिल शर्मा, विधान पार्षद अरविंद शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ एन विजयलक्ष्मी, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ चन्द्रशेखर सिंह, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो सोहेल, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के सचिव नवीन कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम के पश्चात् 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर अधिवेशन भवन से विधानसभा परिसर स्थित पीपल वृक्ष उपवन तक कैंडल मार्च का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी शामिल हुये।


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