यहां स्कूल में छात्र को एक डंडा मारा तो शिक्षक को देने होंगे 3 हजार रुपए जुर्माना, 50 रुपए की चोरी के शक में शिक्षिका ने दिया 45 हजार

कटिहार: एक तरफ राज्य की सरकार और शिक्षा विभाग लगातार बेहतरी का कोशिश में लगी है तो दूसरी तरफ चंद लोग इसे बदनाम करने से भी बाज नहीं आते हैं। ऐसा ही एक ना सामने आया है कटिहार से जहां समाज और शिक्षा विभाग के कुछ लोगों ने छात्र को एक छड़ी मारने की कीमत तीन हजार रुपए लगा दी। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग और समाज के वैसे लोगों पर सवाल खड़ा होने लगा है जिसने छात्रा की पिटाई के बदले शिक्षिका पर अर्थदंड लगाया। अब इस मामले का विभाग ने भी संज्ञान लिया है और कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में प्रखंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या है मामला

मामला कटिहार के कोढ़ा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय झिकटिया की है जहां एक शिक्षिका आभा कुमारी ने 50 रुपए चोरी की शक में एक छात्रा की पिटाई कर दी। बताया जाता है कि शिक्षिका ने छात्रा को कुल 15 छड़ी मारे थे। स्कूल से घर जाने के बाद छात्रा ने अपने परिजनों को मारपीट की जानकारी दी साथ ही निशान दिखाए जिसके बाद परिवार आक्रोशित हो उठा। मामले को लेकर छात्रा के परिजन और स्थानीय ग्रामीणों ने शनिवार को स्कूल पहुंच कर हंगामा शुरू कर दिया साथ ही स्थानीय थाना तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को लिखित शिकायत दी।

जुर्माना में 10 हजार छात्रा को, 35 हजार मंदिर के विकास के लिए

विद्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन देख विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष चंदन कुमार ने शिक्षक, विद्यालय परीक्षा समिति तथा ग्रामीणों की एक बैठक बुलाई। बैठक ने ग्रामीण के साथ ही विद्यालय के प्रधानाध्यापक और अन्य शिक्षकों की मौजूदगी में फैसला लिया गया कि शिक्षिका को प्रति छड़ी तीन हजार रुपए जुर्माना देना होगा। पंचायत ने शिक्षिका पर 15 छड़ी के लिए कुल 45 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जिसमें 10 हजार रुपए छात्रा के परिवार को दिया गया जबकि 35 हजार रुपए मंदिर के विकास के लिए मंदिर समिति के अध्यक्ष को सौंप दिए। 

शिक्षिका ने कहा प्रतिष्ठा बचाने के लिए दिया जुर्माना

मामले में छात्रा की पिटाई के लिए आरोपी शिक्षिका आभा कुमारी ने कहा कि उनसे गलती हुई थी कि छात्रा की पिटाई कर दी। उन्होंने प्रतिष्ठा बचाने के लिए जुर्माना देने के फैसले को माना तथा वह राशि दी। वहीं दूसरी तरफ शिक्षा समिति के अध्यक्ष चंदन कुमार ने दलील दी कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए सामाजिक व्यवस्था के तहत शिक्षिका पर अर्थदंड लगाया गया। वहीं दूसरी तरफ मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बीईओ ने शिक्षिका से स्पष्टीकरण की मांग की है।

सामाजिक लोगों ने की फैसले की शिकायत

वहीं मामले में समाज में अब इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि इस तरह के मामले शिक्षा के मंदिर और विभाग को कलंकित करने वाली है। अगर शिक्षिका से गलती हुई और उन्होंने किसी कारण से छात्रा की पिटाई की तो उन्हें सजा देने के लिए कानून है। कानून के तहत उनके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन यह सामाजिक फैसला हर तरह से गलत है। लोगों का मानना है कि इस मामले में प्रधानाध्यापक को आगे आकर हस्तक्षेप कर विभागीय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए थी न कि इस तरह से जुर्माना लगाना चाहिए।

  

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