दारोगा परीक्षा में भी हुआ पेपर लीक? राजधानी की सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों ने कहा पूर्णिया और गया में...

पटना: देश में इन दिनों सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में एक बार फिर बिहार में दारोगा परीक्षा में पेपर लीक की बात सामने आ रही है। सोमवार को पेपर लीक के विरोध में अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एकत्रित होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए छात्रों ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार से इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मुख्य परीक्षा को अविलंब रद्द कर नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने की पुरजोर मांग की है।

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि आयोग ने बीते 3 जून 2026 को जो आधिकारिक नोटिस जारी किया था, उसमें पूर्णिया और गया जिले में सामने आए संदिग्ध मामलों को पूरी तरह से दबा दिया गया। छात्रों का कहना है कि बिना किसी उच्चस्तरीय फॉरेंसिक जांच के इतनी बड़ी गड़बड़ी के मामले को आनन-फानन में रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो राज्य के लाखों ईमानदार और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ सरासर खिलवाड़ है। आक्रोशित अभ्यर्थियों ने पूर्णिया जिले के एक परीक्षा केंद्र का हवाला देते हुए प्रशासनिक चूक और मिलीभगत की पोल खोली। छात्रों ने बताया कि पूर्णिया के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय केंद्र पर तैनात एक वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने परीक्षा की अवधि के दौरान ही अपने मोबाइल से प्रश्न-पत्र की फोटो खींची थी। इसके बाद उसने उस फोटो को पटना में बैठे अपने एक रिश्तेदार को व्हाट्सएप के जरिए भेज दिया था।

छात्रों ने सवाल उठाया कि जब यह मामला पूरी तरह ऑन-रिकॉर्ड है, तो बीपीएसएससी ने अपने हालिया नोटिस में पूर्णिया की इस गंभीर घटना का जिक्र तक क्यों नहीं किया? आयोग ने बिना किसी गहन तफ्तीश के इस परीक्षा को पूरी तरह ‘अप्रभावित’ घोषित कर दिया, जिससे आयोग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। पूर्णिया के अलावा गया जिले में भी परीक्षा के दौरान बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, गया में स्थानीय जिला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा को प्रभावित करने वाले एक हाईटेक सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया था और कुछ लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई भी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि बीपीएसएससी द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में गया की इस पुलिसिया कार्रवाई का दूर-दूर तक कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

अभ्यर्थियों ने संयुक्त रूप से कहा कि पूर्णिया और गया दोनों ही जिलों के मामलों में आयोग का यह उदासीन और छुपाने वाला रवैया बेहद संदेहास्पद है। छात्रों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और पारदर्शी तरीके से फॉरेंसिक जांच नहीं कराई, तो यह छात्र आंदोलन पटना से निकलकर पूरे बिहार के जिला मुख्यालयों तक फैलेगा।

  

Related Articles

Post a comment