75 वर्ष से पुरानी धरोहरों का होगा डिजिटाइजेशन : DM ने मिशन मोड में कार्य के निर्देश...



भारत की प्राचीन समृद्ध परंपरा एवं विरासत को सहेजने की महत्वपूर्ण पहल: जिला स्तर पर बनी टीम, हर प्रखंड में तेज होगा सर्वे अभियान


मुजफ्फरपुर : भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने तथा भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में जिले में उपलब्ध 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण एवं डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को मिशन मोड में संचालित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ-साथ सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी  एवं अंचलाधिकारी उपस्थित रहे.


जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यह मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने का एक राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सांस्कृतिक संगठनों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया।


क्या है ज्ञान भारतम् मिशन...

बैठक में जानकारी दी गई कि ज्ञान भारतम् मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत देशभर में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, सूचीकरण एवं डिजिटलीकरण किया जा रहा है.


इन पांडुलिपियों में वेद, पुराण, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, दर्शन, साहित्य एवं अन्य विषयों से संबंधित बहुमूल्य ज्ञान निहित है। मिशन का उद्देश्य इस ज्ञान को न केवल सुरक्षित रखना है, बल्कि डिजिटल माध्यम के जरिए शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना भी है.


जिला स्तर पर समिति का गठन, प्रखंडों में नोडल पदाधिकारी नामित...

बैठक में जिलाधिकारी ने सरकारी दिशा-निर्देश एवं मानक के अनुरूप कार्य के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय समिति का गठन किया है। साथ ही, प्रत्येक प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी  को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है।

जिलाधिकारी ने सभी BDO को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने प्रखंडों में टीम का गठन करें तथा आवश्यकता अनुसार संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को शामिल करते हुए दायित्व का स्पष्ट निर्धारण करें। 


पांडुलिपियों के चयन के लिए निर्धारित मानक....

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि मिशन के अंतर्गत केवल वही पांडुलिपियां शामिल की जाएंगी जो न्यूनतम 75 वर्ष पुरानी एवं हस्तलिखित हों। इन पांडुलिपियों की पहचान कर उनका विधिवत दस्तावेजीकरण एवं डिजिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाएगा.


जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिले के प्राचीन मंदिरों, मस्जिदों, मठों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं पुस्तकालयों से समन्वय  एवं संपर्क स्थापित कर पांडुलिपियों के सर्वेक्षण कार्य में तेजी लाई जाय। साथ ही निजी संग्रहकर्ताओं एवं संस्थाओं से भी संपर्क स्थापित कर अधिक से अधिक पांडुलिपियों की पहचान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।


व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाने का निर्देश...

जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान हेतु व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाया जाय। प्रत्येक संस्था या व्यक्ति से संपर्क कर पांडुलिपियों की सूची तैयार की जाय, जिसमें पांडुलिपि का नाम, विषय, भाषा, संरक्षक का नाम, मोबाइल नंबर एवं अनुमानित संख्या का स्पष्ट उल्लेख हो.


उन्होंने कहा कि यह कार्य पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ किया जाय, ताकि जिले में उपलब्ध सभी महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का समुचित दस्तावेजीकरण किया जा सके.


जन-जागरूकता अभियान पर विशेष जोर....

जिलाधिकारी ने इस मिशन को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि आम नागरिक अपने पास सुरक्षित पांडुलिपियों की जानकारी प्रशासन के साथ साझा कर सकें.


इस कार्य में पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, जीविका दीदियों एवं स्वयंसेवी संगठनों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाय। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से लोगों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे इसके संरक्षण में सहयोग करेंगे.


संपर्क के लिए  हेल्पलाइन नंबर जारी...

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जिन व्यक्तियों या संस्थाओं के पास प्राचीन पांडुलिपियां उपलब्ध हैं, वे जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के मोबाइल नंबर 7091172375 पर संपर्क कर सकते हैं। इच्छुक व्यक्ति समाहरणालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर भी पांडुलिपियों से संबंधित जानकारी साझा कर सकते है.


समन्वय एवं साप्ताहिक समीक्षा के निर्देश...

जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इस मिशन की प्रगति की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें तथा सभी संबंधित अधिकारियों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित करें। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके.


समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल...

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं समयबद्ध कार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को दिए गए निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा.


बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन केवल पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने सभी अधिकारियों से इसे जन आंदोलन के रूप में लेने की अपील की.


इस पहल के माध्यम से जिले में बिखरी हुई अमूल्य पांडुलिपियों की पहचान, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक विशाल भंडार सुरक्षित किया जा सकेगा। साथ ही, यह प्रयास भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.


मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट....

  

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