किसानों को खाद बीज की उपलब्धता में न हो कोई परेशानी, कृषि मंत्री ने सख्त लहजे में कहा 'गड़बड़ी..'

डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगा बढ़ावा। FSAS के माध्यम से डिजिटल प्रणाली विकसित, iFMS एवं AgriStack के एकीकरण से सुव्यवस्थित होगी उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया - विजय कुमार सिन्हा

पटना: सोमवार को राजधानी पटना में स्थित कृषि भवन सभागार में ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ विषय पर आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक समय पर एवं सुगमता से उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि उर्वरक किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि इनपुट है और इसकी उपलब्धता, वितरण एवं बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना आवश्यक है। कृषि मंत्री ने कहा कि इसी उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल एवं किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। FSAS (Framework for Fertilizer Sale Application System) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की गई है। इसके साथ iFMS एवं AgriStack के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने का प्रयास किया गया है।

नई व्यवस्था की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जिन किसानों की भूमि संबंधी जानकारी Farmer Registry में उपलब्ध है, उनके लिए आवश्यक विवरण Farmer ID के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। वहीं, अन्य किसान भी FSAS पर पंजीकरण कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए किसान जिस खेत के लिए उर्वरक लेना चाहते हैं, उस खेत का खाता एवं खेसरा संख्या, क्षेत्रफल तथा फसल का विवरण उपलब्ध कराएंगे। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ICAR की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरक की आवश्यकता की गणना की जाएगी तथा किसान को एक QR Code उपलब्ध कराया जाएगा। यह QR Code तीन दिनों तक वैध रहेगा और इसके माध्यम से किसान QR Code में अंकित अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर उर्वरक खरीद सकेंगे।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट वैशाली एवं शेखपुरा जिलों से शुरू किया गया था, जिसके बाद इसका अन्य जिलों में विस्तार किया गया। 1 सितंबर से 19 जिलों में तथा 2 अक्टूबर से पूरे बिहार में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से उर्वरक की बिक्री एवं वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा उपलब्धता, स्टॉक, वितरण एवं बिक्री की बेहतर निगरानी संभव होगी। विजय सिन्हा ने कहा कि नई डिजिटल व्यवस्था को केवल तकनीकी परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि किसान हित में किए जा रहे प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए। डिजिटल प्रणाली लागू करने के साथ यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है कि तकनीक के कारण किसी किसान को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तकनीक का उपयोग किसान की सुविधा के लिए होना चाहिए, किसान की कठिनाई बढ़ाने के लिए नहीं।

कृषि मंत्री ने जिला स्तर के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी उर्वरक विक्रेताओं को नई व्यवस्था की पूरी जानकारी दी जाए तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। किसानों को Farmer ID, FSAS पर पंजीकरण, निर्धारित प्रक्रिया एवं अन्य आवश्यक जानकारियों के संबंध में उचित सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि उर्वरक की उपलब्धता, स्टॉक, वितरण एवं बिक्री की नियमित समीक्षा की जाए। केवल ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर निगरानी पर्याप्त नहीं है। पदाधिकारियों को फील्ड में जाकर उर्वरक की वास्तविक उपलब्धता एवं बिक्री व्यवस्था का भी नियमित रूप से जायजा लेना होगा। विजय सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्धारित मूल्य से अधिक पर उर्वरक की बिक्री, कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल एवं कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए और विभागीय पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसानों को उर्वरक की सुलभ उपलब्धता हो।>

उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें। उन्होंने कहा कि व्यवस्था के तहत किसानों को उर्वरक प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल एवं सुगम हो तथा सभी पात्र किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरक उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित किया जाए। किसी भी तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्या को लंबित न रखा जाए तथा उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। कृषि मंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों से कहा कि वे नई व्यवस्था को पूरी गंभीरता से समझें और इसके क्रियान्वयन के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों एवं सुझावों को खुलकर साझा करें, ताकि व्यवस्था को और अधिक सरल, प्रभावी एवं किसान हितैषी बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के हित में कृषि विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। विभाग का उद्देश्य केवल डिजिटल सिस्टम लागू करना नहीं, बल्कि संपूर्ण उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी, सुव्यवस्थित, जवाबदेह और किसान-केंद्रित बनाना है। कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि विभाग के प्रत्येक पदाधिकारी की जिम्मेदारी है कि सरकार की नीतियों एवं योजनाओं का वास्तविक लाभ खेत और किसान तक पहुंचे। किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक के लिए अनावश्यक परेशानी न हो तथा उन्हें निर्धारित मूल्य पर उर्वरक की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित हो—इसी उद्देश्य के साथ विभाग द्वारा नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

  

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