वर्षों से अधूरा पुल बना जनता के लिए अभिशाप, छात्र राजद ने सरकार और विभाग की लापरवाही का लगाया आरोप
- by Manjesh Kumar
- 27-Jun-2026
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मुजफ्फरपुर: बिहार सरकार के विकास के दावों की पोल खोलने वाला एक और मामला सामने आया है, जहां लगभग एक करोड़ तेतालीस लाख छब्बीस हजार सात सौ रुपये की लागत से सहिला रामपुर से नरमा पथ में निर्माणाधीन एक पुल पिछले चार वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। यह पुल अब विकास का प्रतीक नहीं बल्कि सरकारी उदासीनता, विभागीय लापरवाही और जनता के प्रति असंवेदनशील रवैये का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए यह अधूरा पुल प्रतिदिन परेशानी, भय और दुर्घटना का कारण बना हुआ है इस सड़क में लगातार सड़क दुर्घटना होते रहती है बाढ़ के समय कई पंचायत के आम आवाम परेशान रहता है घरों में पानी घुस जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल निर्माण कार्य तीन वर्ष पहले शुरू किया गया था, लेकिन आज तक इसे पूरा नहीं किया जा सका। निर्माण स्थल पर सुरक्षा के समुचित इंतजाम नहीं होने के कारण आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएँ हो रही हैं और किसी भी बड़ी घटना घट सकती है।
भुगतान नहीं मिलने का बहाना
पुल निर्माण कार्य कर रहे रेडिक्स टेक्नोलॉजी संवेदक द्वारा लगातार यह कहा जा रहा है कि विभाग द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। यदि वास्तव में भुगतान नहीं हुआ है तो यह बिहार सरकार और संबंधित विभाग की गंभीर विफलता है कि चार वर्षों तक एक महत्वपूर्ण जनहित परियोजना को अधर में लटकाए रखा गया। दूसरी ओर, यदि संवेदक भुगतान का बहाना बनाकर कार्य में अनावश्यक विलंब कर रहा है, तो उसके विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आखिर किसके संरक्षण में संवेदक चार वर्षों से जनता को परेशानी में डालकर मनमानी कर रहा है? यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
विभागीय लापरवाही और मिलीभगत के आरोप
शिकायतकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट सह छात्र राजद नेता अमरेन्द्र कुमार का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और संवेदक की मिलीभगत के कारण पुल निर्माण कार्य को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। कई बार शिकायतों और लिखित आवेदन के बावजूद न तो निर्माण कार्य में तेजी लाई गई और न ही दोषी लोगों पर कोई कार्रवाई हुई। अधूरा पुल क्षेत्र के लोगों के लिए अभिशाप बन चुका है। मरीजों, छात्रों, किसानों और आम नागरिकों को रोजाना आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है।
आरटीआई एक्टिविस्ट सह छात्र राजद नेता अमरेन्द्र कुमार ने उठाया मामला
इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाने वाले शिकायतकर्ता, आरटीआई एक्टिविस्ट एवं छात्र राजद नेता अमरेन्द्र कुमार ने कहा कि यह केवल एक पुल का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकार और विभाग की जवाबदेही का प्रश्न है। करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला पुल चार वर्षों तक अधूरा पड़ा रहे और सरकार मूकदर्शक बनी रहे, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शिकायतकर्ता अमरेन्द्र कुमार ने कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर लगातार संबंधित विभाग, लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी संवेदक को बचाने और मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र पुल निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया और दोषी संवेदक एवं अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे मामले को बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के समक्ष रखा जाएगा और राज्यव्यापी जन आंदोलन चलाया जाएगा।
जनता की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं सहेंगे
आरटीआई एक्टिविस्ट सह छात्र राजद नेता अमरेन्द्र कुमार ने कहा कि अधूरे पुल के कारण हो रही दुर्घटनाएं सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम हैं। जनता की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग, संवेदक और सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर जनता को केवल अधूरे निर्माण कार्य और झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं। यह सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
शिकायतकर्ता का मुख्य मांग प्रमुख मांगें
- निर्माणाधीन पुल का कार्य तत्काल युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए।
- निर्माण कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- संवेदक के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
- निर्माण स्थल पर सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए जाएं।
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- अब तक हुई दुर्घटनाओं की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
आरटीआई एक्टिविस्ट सह छात्र राजद नेता अमरेन्द्र कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और विभाग ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो इस मुद्दे को राज्य स्तर पर उठाया जाएगा तथा व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभाग की होगी।
मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट


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