बरारी में कृषि व्यवस्था पर उठे सवाल, धान बीज वितरण में देरी से किसान परेशान

बीस सूत्री अध्यक्ष मनोज सिंह कुशवाहा का आरोप— किसानों व जनप्रतिनिधियों को बैठकों से रखा जाता है दूर, बीईओ की कार्यशैली की जांच हो

कटिहार: कृषि प्रधान एवं हर वर्ष बाढ़ की मार झेलने वाले बरारी प्रखंड में किसानों की समस्याओं को लेकर बीस सूत्री अध्यक्ष मनोज सिंह कुशवाहा ने प्रखंड कृषि विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धान की नर्सरी तैयार करने का समय बीत रहा है, लेकिन अब तक किसानों के बीच धान बीज का वितरण शुरू नहीं किया गया है। इससे हजारों किसानों के सामने समय पर खेती करने का संकट उत्पन्न हो गया है। बीस सूत्री अध्यक्ष ने कहा कि बरारी की अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां किसानों के पास खेती का समय सीमित होता है। ऐसे में यदि कृषि विभाग समय पर बीज उपलब्ध नहीं कराएगा तो इसका सीधा असर धान उत्पादन पर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

मनोज सिंह कुशवाहा ने आरोप लगाया कि प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीईओ) नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं। किसान अपनी समस्याओं को लेकर कई बार कृषि कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें अधिकारी नहीं मिलते। इससे किसानों को बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कृषि विभाग में आयोजित होने वाली बैठकों में पारदर्शिता का अभाव है। उनके अनुसार विभाग द्वारा किसानों को बैठक में आमंत्रित नहीं किया जाता, बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों को बुलाकर बैठक की औपचारिकता पूरी कर प्रस्ताव पारित कर दिए जाते हैं। इतना ही नहीं, प्रखंड के बीस सूत्री अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी इन बैठकों की सूचना तक नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की समीक्षा और किसानों से जुड़े निर्णयों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, लेकिन बरारी में इसकी अनदेखी की जा रही है।

बीस सूत्री अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मक्का फसल क्षति के पात्र किसानों को अब तक क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि विभाग की लापरवाही के कारण किसान सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। मनोज सिंह कुशवाहा ने जिला कृषि पदाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, प्रखंड कृषि पदाधिकारी की कार्यशैली की समीक्षा करने तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अविलंब धान बीज वितरण शुरू कराने, लंबित मक्का क्षतिपूर्ति का भुगतान कराने तथा भविष्य में कृषि विभाग की बैठकों में किसानों एवं जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे किसानों के साथ मिलकर आंदोलन करने को विवश होंगे। समाचार प्रकाशित होने तक प्रखंड कृषि पदाधिकारी का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। 

  

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