पूर्णिया विश्वविद्यालय के खिलाफ छात्र अनशन पर बैठे, करोड़ों रुपये की शुल्क वसूली का लगाया आरोप

पूर्णिया: पूर्णिया विश्वविद्यालय में नामांकन आवेदन शुल्क, छात्र हितों की अनदेखी तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली के विरोध में छात्र नेता पियूष पूजारा अपने समर्थकों के साथ थाना चौक पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। अनशन की शुरुआत से पहले उन्होंने और उनके साथियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा छात्र अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। अनशन पर बैठे छात्र नेता पियूष पूजारा ने कहा कि जब तक पूर्णिया विश्वविद्यालय उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि छात्र हितों से जुड़े हर मुद्दे पर वे हमेशा छात्रों के साथ खड़े रहेंगे और किसी भी प्रकार के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

छात्र नेताओं का आरोप है कि पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा नामांकन आवेदन के नाम पर छात्रों से वर्षों से भारी-भरकम शुल्क लिया जा रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के शुरुआती दौर में 600 रुपये आवेदन शुल्क इसलिए लिया जाता था क्योंकि नामांकन से पहले प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती थी और उसके आधार पर मेरिट सूची तैयार होती थी। लेकिन बाद के वर्षों में प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई और छात्रों के पूर्व प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार कर नामांकन लिया जाने लगा। इसके बावजूद आवेदन शुल्क में कोई कमी नहीं की गई। पियूष पूजारा ने दावा किया कि वर्ष 2018 से 2025 तक स्नातक नामांकन के लिए प्रत्येक सत्र में औसतन 40 हजार छात्रों ने आवेदन किया। यदि प्रति छात्र 600 रुपये आवेदन शुल्क लिया गया तो सात सत्रों में यह राशि लगभग 16 करोड़ 80 लाख रुपये होती है। इसी प्रकार पीजी नामांकन के लिए प्रति छात्र 1000 रुपये आवेदन शुल्क लिया गया। सात वर्षों में औसतन पांच हजार छात्रों के आवेदन के आधार पर यह राशि लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपये बैठती है। इस प्रकार कुल मिलाकर 20 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की राशि छात्रों से वसूली गई।

छात्र नेताओं का आरोप है कि जब प्रवेश परीक्षा आयोजित ही नहीं हुई तो इतनी बड़ी राशि किस मद में खर्च की गई, इसका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। आंदोलनकारियों ने विश्वविद्यालय में संचालित पोर्टलों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा छात्रों की सुविधा के लिए सामर्थ पोर्टल उपलब्ध कराया गया है, लेकिन वर्षों तक अन्य पोर्टलों के माध्यम से कार्य कर छात्रों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन और पोर्टल संचालकों के बीच पारदर्शिता का अभाव रहा है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ा। इसके अलावा छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर परीक्षा परिणाम, पुनर्मूल्यांकन और अन्य शैक्षणिक निर्णयों में भी पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अनशन स्थल पर मौजूद छात्रों ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र के अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में अनावश्यक शुल्क उनके ऊपर अतिरिक्त बोझ डालता है। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। फिलहाल छात्र नेता पियूष पूजारा और उनके समर्थक थाना चौक पर अनशन पर डटे हुए हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

  

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