जलवायु जागरूकता तभी सार्थक है, जब वह पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार में बदले - डॉ निखिल कांत

विश्व निशाने पर है (Planet Is On Target; VNPH) जलवायु संकट जागरूकता अभियान के संस्थापक एवं 'पोएटिक क्लाइमेटोलॉजी' के प्रवर्तक डॉ निखिल कांत ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का समाधान केवल चर्चा और चिंतन से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने से संभव है। उन्होंने कहा कि जलवायु जागरूकता का अंतिम उद्देश्य लोगों को ऐसे व्यवहार के लिए प्रेरित करना है, जो पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बना सके। डॉ कांत ने ये विचार डेजर्टिफिकेशन एंड ड्रॉट डे 2026 (मरुस्थलीकरण एवं सूखा दिवस) के अवसर पर आयोजित "वीएनपीएच एक्सपर्ट एक्सप्लेन्स" व्याख्यानमाला के विशेष कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सार्थक जलवायु कार्रवाई व्यक्ति से शुरू होती है, समाज तक पहुँचती है और सामूहिक जनभागीदारी के माध्यम से एक व्यापक आंदोलन का रूप लेती है।

, टीवी प्रस्तोता तथा वीएनपीएच के स्ट्रैटेजिक कोहोर्ट सदस्य मनोज 'भावुक' के उद्घाटन वक्तव्य से हुई। उन्होंने कहा कि साहित्य, कविता, कहानी और अन्य रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ समाज में चेतना जगाने का सशक्त माध्यम हैं। इनके जरिए जलवायु संकट जैसे गंभीर विषयों को आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकता है तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ग्रीन इलेक्शन" विषय पर डॉ. हीरा लाल पटेल, आईएएस, सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार का व्याख्यान रहा। ग्रीन इलेक्शन अभियान के प्रणेता डॉ. पटेल ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और शासन व्यवस्था में पर्यावरणीय दृष्टिकोण को शामिल करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, "ग्रीन इलेक्शन, ग्रीन गवर्नेंस का व्यवहारिक स्वरूप है।

समापन टिप्पणी में डॉ नीरज सक्सेना, प्रो-चांसलर, जेआईएस यूनिवर्सिटी तथा वीएनपीएच के स्ट्रैटेजिक कोहोर्ट सदस्य ने कहा कि सतत विकास का भविष्य ऐसे नागरिकों के निर्माण पर निर्भर करता है जो पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार हों। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को ऐसे युवाओं का निर्माण करना चाहिए जो तकनीकी प्रगति और पर्यावरणीय संतुलन के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित कर सकें। कार्यक्रम में ब्रिटेन के कैम्ब्रिज से लेफ्टिनेंट कमांडर अखिल शर्मा और जॉन होंगराय ने वर्चुअल सहभागिता की। उन्होंने जलवायु जागरूकता को व्यक्तिगत व्यवहार से जोड़ने तथा 'पोएटिक क्लाइमेटोलॉजी' जैसी अभिनव अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए वीएनपीएच की सराहना की। उन्होंने भारत और ब्रिटेन में अपनाई जा रही टिकाऊ जीवनशैली और पर्यावरणीय पहलों पर भी अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में डॉ के अंजलि, निदेशक, वीएनपीएच फाउंडेशन एवं संयोजक, वीएनपीएच ने मरुस्थलीकरण एवं सूखा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ भूमि और सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पर्यावरण से जुड़े अपेक्षाकृत कम चर्चित अंतरराष्ट्रीय दिवसों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की वीएनपीएच की प्रतिबद्धता दोहराई। वर्ष 2004 में स्थापित वीएनपीएच विशेषज्ञ संवाद, कविता, कहानी, संगीत, दृश्य कला और जनसहभागिता के माध्यम से जलवायु चेतना का विस्तार कर रहा है तथा दुनिया भर के लोगों को MOCLI (Mates Of Climate) बनने के लिए प्रेरित कर रहा है।

  

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