शीशियां पंचायत में ‘मानक’ की बलि! मनरेगा से बन रहे कलवर्ट में घटिया निर्माण का आरोप

8-10 एमएम सरिया, गंदा कंक्रीट और छड़ों में डेढ़ फीट तक गैप; बोर्ड गायब, योजना पर उठे सवाल

कटिहार: बरारी प्रखंड अंतर्गत शीशियां पंचायत के वार्ड संख्या 13 में मनरेगा से बन रहे कलवर्ट निर्माण कार्य पर ग्रामीणों के द्वारा अनियमितता के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। घटिया कंक्रीट, कम मोटाई वाले 8 और 10 एमएम सरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं छड़ों की बाइंडिंग भी तय मानक के विपरीत 6 से 8 इंच की जगह करीब 1 से 1.5 फीट की दूरी पर की जा रही है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। शीशियां पंचायत के वार्ड संख्या 13 में बन रहे कलवर्ट को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी कर जल्दबाजी में काम कराया जा रहा है। आरोप है कि कलवर्ट ढलाई में इस्तेमाल हो रहा कंक्रीट भी गुणवत्ताहीन है, जिससे निर्माण की मजबूती शुरू से ही संदेह के घेरे में आ गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कलवर्ट निर्माण में 8 एमएम और 10 एमएम के पतले सरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि इस तरह के निर्माण कार्य में मजबूत और मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, सरिया बांधने में भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। जहां छड़ों की दूरी सामान्यतः 6 से 8 इंच के भीतर रखी जानी चाहिए, वहां 1 से 1.5 फीट तक की दूरी पर छड़ बांधकर काम किया जा रहा है। इससे कलवर्ट की मजबूती पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यही वजह है कि बिहार में आए दिन पुल-पुलिया और कलवर्ट निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं और कई जगह निर्माण के कुछ ही समय बाद ढांचे कमजोर पड़ जाते हैं। लोगों का आरोप है कि अगर निर्माण कार्य में शुरू से ही मानकों की अनदेखी की जाएगी तो सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद टिकाऊ निर्माण की उम्मीद बेमानी होगी।

मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि कार्यस्थल पर योजना संबंधी सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों को यह तक जानकारी नहीं मिल पा रही है कि कलवर्ट किस योजना के तहत बन रहा है, इसकी स्वीकृत लागत कितनी है, किस मद से राशि खर्च की जा रही है और निर्माण एजेंसी अथवा जिम्मेदार पदाधिकारी कौन हैं। सूचना बोर्ड नहीं रहने से पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की जांच नहीं हुई तो सरकारी राशि का दुरुपयोग तो होगा ही, साथ ही भविष्य में यह कलवर्ट भी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है।

इस संबंध में कनीय अभियंता सुधीर कुमार मंडल ने बताया कि कार्य में गड़बड़ी की सूचना मिली है। मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं कार्यक्रम पदाधिकारी श्यामदेव कुमार ने कहा कि गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। पूरे प्रखंड क्षेत्र में जहां-जहां इस तरह के कार्य चल रहे हैं, उन सभी की जांच कराई जाएगी और जिस भी कार्य में कमी पाई जाएगी, उससे संबंधित भुगतान रोक दिया जाएगा।

  

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