पप्पू यादव ने प्रभारी मंत्री के सामने खोली जिले की व्यवस्थाओं की पोल, कहा 'हर वर्ष खर्च के बावजूद होता है...'
- by Manjesh Kumar
- 15-Jun-2026
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सांसद पप्पू यादव ने प्रभारी मंत्री के सामने खोली व्यवस्थागत खामियों की परतें। कहा ‘नदी घेर दी गई, नाले बंद हैं, शहर डूबेगा तो जिम्मेदार कौन? बिजली, अस्पताल, नगर निगम और रजिस्ट्री कार्यालय पर भी उठाए तीखे सवाल। ‘फ्लड फाइटिंग में हर साल पैसा खर्च होता है, फिर कटाव क्यों नहीं रुकता : सांसद
पूर्णिया: पूर्णिया समाहरणालय स्थित महानंदा सभागार में सोमवार को आपदा प्रबंधन विभाग एवं पूर्णिया के प्रभारी मंत्री रत्नेश सादा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति, संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ पूर्व तैयारी तथा जल-जीवन-हरियाली की तृतीय परामर्शदात्री समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी शामिल हुए। समीक्षा के दौरान आगामी बाढ़ और सुखाड़ से निपटने की तैयारियों, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस दौरान सांसद पप्पू यादव ने व्यवस्था की कई कमियों और जमीनी समस्याओं को खुलकर उठाते हुए गंभीर सवाल रखे। उन्होंने कहा कि नहर, नदी और नालों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है, जिससे जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में नालों का निर्माण एवं सफाई नहीं होने से बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नदियों को घेरकर छोटा कर दिया गया है और माफियाओं के कब्जे के कारण प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो रहा है। उन्होंने सरकारी जमीनों की अवैध रजिस्ट्री और अतिक्रमण के मामलों की भी जांच की मांग की।
बैठक में सांसद पप्पू यादव ने बाढ़ राहत एवं कटाव निरोधी कार्यों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर वर्ष फ्लड फाइटिंग और एंटी इरोजन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन बाढ़ आने पर वही समस्याएं फिर सामने आ जाती हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर यह पैसा कहां जा रहा है और इसकी जांच क्यों नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय नाविकों को भुगतान नहीं मिलता, राहत सामग्री समय पर नहीं पहुंचती और सामुदायिक किचन भी कुछ दिनों बाद बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को राहत कार्यों की निगरानी में शामिल किया जाए।
बैठक में खनन विभाग, डीटीओ, एमवीआई और अन्य विभागों की कार्यशैली पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि बड़े वाणिज्यिक वाहनों पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि किसानों और छोटे वाहन चालकों को परेशान किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन और परिवहन व्यवस्था आम लोगों के लिए भय का कारण बनती जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने बुडको और नगर निकायों में हुए कार्यों की गुणवत्ता तथा हाल में सामने आए ब्रोकर रिशु श्री के भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कटिहार, पूर्णिया, सहरसा और मधेपुरा सहित सभी नगर निगम क्षेत्रों में हुए कार्यों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर मंत्री या अधिकारी की संलिप्तता है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक के दौरान सांसद पप्पू यादव ने बिजली व्यवस्था की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हल्की आंधी और बारिश के बाद कई इलाकों में 72 घंटे तक बिजली नहीं रहती। कहीं तार नहीं हैं, कहीं बांस के सहारे लाइनें चल रही हैं और ट्रांसफॉर्मर क्षमता से कम लगाए जाने के कारण बार-बार जल जाते हैं। उन्होंने ट्रांसमिशन व्यवस्था की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की। पप्पू यादव ने जल-जीवन-हरियाली अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि तालाबों और जलस्रोतों पर अतिक्रमण हो चुका है तथा हरियाली मिशन का प्रभाव जमीन पर दिखाई नहीं देता। उन्होंने विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के चयन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक पारंपरिक कारीगरों तक योजना का लाभ नहीं पहुंच रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति, सोलर परियोजनाओं की विफलता और नगर निगमों की सफाई व्यवस्था पर भी उन्होंने नाराजगी जताई तथा संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सांसद ने रजिस्ट्री कार्यालयों में व्याप्त कथित अनियमितताओं, म्यूटेशन और जमाबंदी में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि तीन महीने में होने वाले कार्य वर्षों तक लंबित रहते हैं और आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। परिमार्जन और भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की जमीनों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने स्मार्ट सिटी परियोजना, पूर्णिया बस स्टैंड निर्माण और अन्य विकास योजनाओं की धीमी प्रगति पर भी चिंता व्यक्त की। पूर्णिया बस स्टैंड निर्माण का निर्माण अभी तक क्यों नहीं हो रहा है, जबकि उसके लिए 48 करोड़ रूपये का बजट है। सांसद ने पूर्णिया में स्मार्ट सिटी के नाम पर जमीन खरीद बिक्री पर रोक को लेकर कहा कि सरकार को खाली पड़ी सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य करना चाहिए, ना कि गरीब किसान के खेतों पर कब्जा कर। बैठक के अंत में उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित हो। समीक्षा बैठक में मंत्री रत्नेश सादा ने विभिन्न विभागों को प्राप्त सुझावों और शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई करने तथा जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।


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