ईडी सीबीआई का डर दिखा भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी का अपहरण करने की कोशिश की - पप्पू यादव

रिशु श्री, आनंद किशोर और अन्य भ्रष्टाचारियों का बचाने के लिए किया जा रहा एनकाउंटर, शिक्षक विवाद, घर खाली करने का विवाद। नेता विपक्ष की कुर्सी, इडी और सीबीआई का डर दिखा कर किया गया लोकतंत्र के अपहरण की कोशिश : पप्पू यादव

पटना: पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने सोमवार को राजधानी पटना में राज्यसभा चुनाव में ऑपरेशन लोटस को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की कुर्सी का ईडी और सीबीआई का डर दिखा कर बीजेपी द्वारा लोकतंत्र के अपहरण की कोशिश की गई। इसमें राजद के कुछ नेता और विधायक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कुछ बड़े कारोबारी, राजनीतिक संपर्क रखने वाले लोग और बिचौलियों के माध्यम से विधायकों तक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया। बिहार में इसके लिए 100 करोड़ रुपए भी आए। इसमें उन्होंने अभय कुशवाहा, सुभाष यादव, समीर महासेठ जैसे नामों का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि कई लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

सांसद पप्पू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों के माध्यम से कथित तौर पर लिफाफे पहुंचाए गए और विधायकों पर दल बदलने का दबाव बनाया गया। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की मांग की गई है। आरोप है कि कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच सत्ता समीकरण बदलने के लिए रणनीति बनाई गई, जिसमें केंद्रीय एजेंसियों के दबाव का भी इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई। हम इन आरोपों के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, हॉर्स ट्रेडिंग से जुड़े मामलों में कार्रवाई और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा की मांग उठाई गई है। सांसद पप्पू यादव ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बिहार में हो रहे हैं लगातार इनकाउंटर पर सवाल खड़ा किया और कहा कि यह जानबूझकर किया जा रहा है, ताकि इसके आड़ में आनंद किशोर रिशु श्री जैसे भ्रष्टाचारियों के मुद्दे को दबाया जा सके। इसी साजिश का नतीजा है कि कभी लालू प्रसाद यादव को घर खाली करने के लिए जबरन कहा जाता है तो कभी तो शिक्षक की लड़ाई को फैजल खान और रोशन यादव के रूप में हवा दी गई। इतना ही नहीं जानबूझकर बिहार में निर्दोष और निहत्थे लोगों का एनकाउंटर करवा कर न्यायपालिका को भी चैलेंज किया जा रहा है। नहीं तो अगर इतने ही दूध के धुले हुए पुलिस वाले और प्रशासन के लोग हैं तो पप्पू पांडे और अनंत सिंह को गिरफ्तार क्यों नहीं कर पाए? भरत तिवारी कोई अपराधी या हिस्ट्रीशीटर नहीं था और ना ही वह हथियार से उन पर फायरिंग कर रहा था फिर भी जाति का रंग देकर फर्जी एनकाउंटर कर देना बेहद गंभीर और निंदनीय है। 

पप्पू यादव ने कहा कि हम इस मामले में न्यायिक जांच की मांग करते हैं, जिसमें यह भी देखा जाए कि आरा के एसपी के साथ उस समय हेडक्वार्टर से कौन लाइन पर था? वहीं, बीजेपी और सरकार के अन्य लोगों ने जब कह दिया कि भरत तिवारी का एनकाउंटर गलत था, तो सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए और उन्हें शहीद का दर्जा देना चाहिए। हम बिहार में हुए सभी एनकाउंटर के जांच की मांग करते हैं। इसके अलावा इस सरकार में 150 से अधिक बलात्कार हुए हैं, जो मणिपुर और निर्भया की घटना के हद को पार कर दी गई। क्या बिहार में 20 साल से नीतीश सरकार अपराधी और माफिया के साथ सरकार चला रहे थे? तब ऐसे एनकाउंटर क्यों नहीं हुआ करते थे। इसलिए हम 24 को राज्य पाल से मिलेंगे और न्यायालय में भी विभिन्न अपराध की घटनाओं और पुलिस की संलिप्तता को लेकर जायेंगे। 

उन्होंने नगरनौसा, बिहारशरीफ और बेगूसराय की घटना पर सांसद पप्पू यादव ने गंभीर सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा कि नगरनौसा में बेटियों ने जब डिग्री कॉलेज की मांग की, तब वहां के थाना प्रभारी, बीडीओ, सीओ मिलकर जवान लड़कियों को प्रताड़ित किया। जेल भेजा। थाने में गंदी गालियां दी। उसी तरह बिहारशरीफ में 2 निवाला खाने की वजह से दो पासवान की हत्या कर दी गई। आखिर बिहार को इतनी अराजकता क्या शासन का इकबाल है? सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मेरा सवाल ये भी है क्या आज बिहार में जाति के आधार पर ही हिंसा क्यों बढ़ रही है। क्या बिहार में यादव, पासवान, दलित और कमजोर आदमी को बिहार छोड़ देना चाहिए?

  

Related Articles

Post a comment