सुबह से स्कूल में छात्रों को देते हैं शारीरिक ट्रेनिंग, छुट्टी मिलने के बाद झालमुड़ी बेचते हैं शिक्षक
- by Manjesh Kumar
- 21-Aug-2026
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भागलपुर: भागलपुर में सरकारी शिक्षक की नौकरी को लेकर आम धारणा भले ही सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी की हो, लेकिन सन्हौला प्रखंड से सामने आई एक तस्वीर इस व्यवस्था की दूसरी हकीकत दिखाती है। अमडंडा मध्य विद्यालय में शारीरिक शिक्षक एवं स्वास्थ्य अनुदेशक के तौर पर काम करने वाले निशांत कुमार स्कूल में बच्चों को PT और खेलकूद की ट्रेनिंग देते हैं, लेकिन स्कूल की ड्यूटी खत्म होने के बाद उन्हें परिवार चलाने के लिए झालमुड़ी और स्टेशनरी बेचनी पड़ती है। निशांत कुमार की वर्ष 2022 में शारीरिक शिक्षक एवं स्वास्थ्य अनुदेशक के पद पर नियुक्ति हुई थी। शुरुआत में उन्हें 8 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। करीब तीन साल तक मानदेय बढ़ाने की मांग और संघर्ष के बाद राशि बढ़ाकर 16 हजार रुपये कर दी गई। हालांकि, महंगाई के मौजूदा दौर में उनका कहना है कि इतनी रकम से परिवार का राशन, बच्चों की जरूरतें और रोजमर्रा का खर्च चलाना बेहद मुश्किल है।
स्कूल के बाद लगाते हैं झालमुड़ी की दुकान
निशांत कुमार स्कूल में बच्चों को अनुशासन, PT और खेलकूद की ट्रेनिंग देने के बाद स्कूल के बाहर ही छोटी सी दुकान लगाते हैं। यहां वह झालमुड़ी और स्टेशनरी का सामान बेचते हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में स्कूल के बाहर दुकान लगाने में झिझक और शर्म महसूस होती थी, लेकिन परिवार की जरूरतों के सामने यह भावना पीछे छूट गई। दुकान से उन्हें रोजाना करीब 300 से 400 रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। इसी अतिरिक्त कमाई से वह परिवार के खर्च को किसी तरह संभाल पा रहे हैं। सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि जिन बच्चों को वह सुबह स्कूल में PT कराते हैं, उन्हीं में से कई बच्चे शाम को उनकी दुकान पर झालमुड़ी खरीदने पहुंचते हैं।
निशांत कुमार की मांग है कि शारीरिक शिक्षकों और स्वास्थ्य अनुदेशकों को अंशकालिक व्यवस्था से बाहर निकालकर पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा दिया जाए और उनके मानदेय में उचित बढ़ोतरी की जाए, ताकि उन्हें परिवार चलाने के लिए अतिरिक्त काम न करना पड़े।
कम मानदेय से कई शिक्षक परेशान
निशांत कुमार का मामला अकेला नहीं है। कम मानदेय के कारण बिहार में कई शारीरिक शिक्षक और स्वास्थ्य अनुदेशक आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। कोई स्कूल के बाद डिलीवरी बॉय का काम कर रहा है तो कोई अगरबत्ती बेचकर परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहा है। अमडंडा के छात्रों का कहना है कि उनके PT सर उन्हें बहुत अच्छी ट्रेनिंग देते हैं। छात्रों को अपने शिक्षक को झालमुड़ी बेचते देखकर अच्छा नहीं लगता, लेकिन वे उनकी मजबूरी को समझते हैं। छात्रों की भी मांग है कि सरकार शिक्षकों का वेतन बढ़ाए और उन्हें पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा दे।


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