6 वर्ष पहले परिवार से बिछड़ युवती मांग रही थी भीख, भिक्षावृत्ति योजना के तहत टीम ने घर पहुंचाया
- by Manjesh Kumar
- 16-Jun-2026
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पुर्णिया: पूर्णिया समाज कल्याण विभाग बिहार सरकार द्वारा प्राप्त विभागीय निर्देशों और दिशा-निर्देशों के शत-प्रतिशत अनुपालन के आलोक में जिले में 'मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना' के तहत एक बड़ी और भावुक सफलता हासिल की है। सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा अमरेश कुमार के सीधे निर्देशन और कुशल प्रबंधन में, शांति कुटीर महिला भिक्षुक पुनर्वास गृह द्वारा 6 लंबे वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ी एक युवती को उसके पिता एवं भाई के सुपुर्द कर सफलतापूर्वक पुनर्वासित किया गया है।
विगत इतिहास और शांति कुटीर में आगमन विभागीय अभिलेखों के अनुसार, यह महिला दिनांक 3 मार्च 2021 को पूर्णिया के के हाट थाना द्वारा शांति कुटीर, पूर्णिया में पहुँचाई गई थी। आगमन के समय महिला अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी और अपना पता व नाम बताने की स्थिति में नहीं थी। इस कारण संस्था द्वारा उसका एक काल्पनिक नाम 'खेजू खातून' रखा गया था। शांति कुटीर में उसे बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में रखा गया, जहाँ वह धीरे-धीरे सभी सदस्यों के साथ घुल-मिल गई। वह संस्था में रसोइया के साथ खाना बनाने में हाथ बटाती थी और सिलाई का कार्य भी करती थी। काउंसलिंग से खुला वास्तविक नाम और घर का पता संस्था के काउंसलर द्वारा लगातार की गई प्यार भरी और गहन काउंसिलिंग के सकारात्मक परिणाम सामने आए। दिनांक 09/06/2026 को युवती ने आखिरकार अपना वास्तविक नाम शाहजुरुन खातून बताया और अपने घर का पता किशनगंज जिला, हवाई अड्डा के रूप में दर्ज कराया। घर से लापता होने का कारण और परिवार की खोज काउंसिलिंग के दौरान यह दुखद सत्य सामने आया कि शाहजुरुन खातून की माँ की मृत्यु हो जाने के कारण उसे गहरा मानसिक सदमा लगा था, जिसके कारण वह मानसिक संतुलन खोकर अपने घर से निकल गई थी और भटकते हुए पूर्णिया पहुँच गई थी।
पता प्राप्त होते ही स्थानीय वार्ड पार्षद से तुरंत संपर्क स्थापित किया गया। वार्ड पार्षद के सहयोग से जब युवती के पिता को अपनी बेटी के सुरक्षित होने की सूचना मिली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने तुरंत पुष्टि की कि शाहजुरुन खातून उन्हीं की बेटी है। सहायक निदेशक का त्वरित आदेश और आँखों में आए खुशी के आँसू जैसे ही इसकी सूचना सहायक निदेशक अमरेश कुमार एवं जिला प्रबंधक उषा कुमारी को दी गई, वैसे ही सर द्वारा बिना किसी विलंब के सख्त निर्देश दिया गया कि महिला को अविलंब सम्मानपूर्वक उसके परिवार के साथ पुनर्वासित किया जाए।
दिए गए निर्देशों के तहत तुरंत परिजनों से बात कर उन्हें 10 जून को शांति कुटीर गृह में बुलाया गया। गृह परिसर में जैसे ही वृद्ध पिता मो सज्जाद और भाई जहाँगीर ने 06 वर्षों बाद अपनी बेटी/बहन को देखा, दोनों पक्षों की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े और वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। हम शांति कुटीर के इस महान कार्य की काफी सराहना करते हैं। संस्था के अथक प्रयास से ही मेरी बेटी 06 सालों के बाद मुझसे मिल पाई है; नहीं तो इसे ढूंढ पाना या यह मिलन संभव ही नहीं था। इस अवसर पर युवती के पिता, भाई और उनके साथ आए मामा एवं वार्ड पार्षद ने शांति कुटीर गृह के सभी सदस्यों, जिला प्रशासन एवं बिहार सरकार का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया।


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