पेपर लीक मामले की सुनवाई के लिए तीन विशेष अदालत गठित, 90 दिन के अंदर होगा फैसला

पटना: इन दिनों बिहार समेत देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक का मामला सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पेपर लीक के विरोध में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन हाल ही में खत्म हुआ है और अब इस कर पूरे देश में चर्चा हो रही है। एक तरफ केंद्र सरकार ने संसद में पेपर लीक पर कड़ा कानून बनाने के लिए विधेयक पेश किया है तो दूसरी तरफ बिहार में भी इस मामले में बड़ा फैसला लिया गया है। पटना हाई कोर्ट ने द पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) एक्ट 2024 के तहत दर्ज किसी की स्पीडी ट्रायल के लिए तीन विशेष अदालतें बनाने का निर्णय लिया है। ये तीनों फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट पटना, लखीसराय और पूर्णिया जिलों में स्थापित किए जा रहे हैं  हाईकोर्ट ने इन तीनों शहरों में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश स्तर की अदालतें बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है।

इन विशेष अदालतों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां मुकदमों को सालों तक लटकाया नहीं जाएगा। कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होते ही केस की रोजाना सुनवाई शुरू हो जाएगी। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, पीठासीन अधिकारियों को ट्रायल शुरू होने के महज 90 दिन के भीतर सुनवाई पूरी करके अपना फैसला सुनाना होगा। इससे केसों का त्वरित निपटारा संभव हो सकेगा। पटना हाईकोर्ट ने इन स्पेशल कोर्ट में केसों की सुनवाई के लिए पीठासीन अधिकारियों के नामों की भी घोषणा कर दी है। पटना के स्पेशल कोर्ट की जिम्मेदारी गौरव सिंह संभालेंगे, लखीसराय कोर्ट के लिए सीमा भारतीय और पूर्णिया के लिए ठाकुर अमन कुमार को नामित किया गया है। हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से अनुरोध किया है कि वह जल्द से जल्द इन तीनों अदालतों को अधिसूचित कर नामित अधिकारियों की पदस्थापना की प्रक्रिया पूरी करे।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान बिहार लोक सेवा आयोग और नीट समेत कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक के मामले सामने आए थे। लंबी जांच और कानूनी प्रक्रिया में देरी की वजह से तैयारी करने वाले छात्रों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा था। नए कानून और इन स्पेशल कोर्ट से दोषियों को तेजी से सजा मिलेगी, जिससे परीक्षा प्रणाली में युवाओं का भरोसा फिर से बहाल हो सकेगा। रोजाना सुनवाई और 90 दिनों की तय समय सीमा के भीतर फैसला आने से पेपर लीक करने वाले संगठित गिरोहों के हौसले पस्त होंगे। इससे न सिर्फ अदालत और न्याय प्रक्रिया की रफ्तार तेज होगी, बल्कि राज्य भर की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी वापस लौटेगी।

  

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