कलवर्ट निर्माण पूरा होने के बाद चार किलोमीटर की दूरी हो जाएगी 400 मीटर, ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल फिर...

कटिहार: कटिहार के बरारी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सुखासन पंचायत के वार्ड संख्या-1 स्थित सिमरतल्ला गांव में मनरेगा योजना के तहत निर्माणाधीन आरसीसी कलवर्ट क्षेत्र के हजारों किसानों और ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह खोलने जा रहा है। कलवर्ट निर्माण पूरा होने के बाद जहां दो पंचायतों के बीच संपर्क बेहतर होगा, वहीं किसानों को अपनी उपज बाजार और मंडियों तक पहुंचाने में भी काफी सुविधा मिलेगी। इस परियोजना को क्षेत्र के लोगों द्वारा लंबे समय से महसूस की जा रही आवागमन की समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के अनुसार सिमरतल्ला में बन रहा यह कलवर्ट काबर और सुखासन पंचायत के बीच संपर्क स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा। वार्ड सदस्य प्रतिनिधि रामविलास मंडल एवं जदयू पंचायत अध्यक्ष मनीष कुमार ने बताया कि वर्तमान में किसानों और ग्रामीणों को आने-जाने के लिए लगभग चार किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। कलवर्ट बनने के बाद यह दूरी घटकर महज 400 मीटर रह जाएगी। इससे समय, श्रम और परिवहन लागत में भारी कमी आएगी।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं। किसानों को फसल तैयार होने के बाद उसे बाजार या मंडी तक पहुंचाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी कठिन हो जाती है। ऐसे में कलवर्ट का निर्माण किसानों के लिए राहत लेकर आएगा। इससे खेती-किसानी से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी और कृषि उत्पादों का परिवहन भी सुगम होगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह कलवर्ट केवल एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

इधर, निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता को लेकर कुछ ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों को आशंका थी कि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसी आशंका के चलते बुधवार को कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया। ग्रामीणों का आरोप था कि निर्माण में उपयोग किए जा रहे सरिया की मोटाई स्वीकृत मानक के अनुरूप नहीं है। मामले की जानकारी मिलने पर पंचायत रोजगार सेवक मो शकील निर्माण स्थल पर पहुंचे और कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों के साथ बैठक कर योजना की तकनीकी जानकारी साझा की। पंचायत रोजगार सेवक ने बताया कि कलवर्ट का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों को योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई तथा निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया। इसके बाद अधिकांश ग्रामीण संतुष्ट दिखाई दिए और निर्माण कार्य पुनः शुरू हो गया।

हालांकि कुछ ग्रामीणों ने सरिया के उपयोग को लेकर अपनी आपत्ति बरकरार रखी। उनका कहना था कि कलवर्ट निर्माण में 14 और 16 एमएम सरिया का प्रयोग होना चाहिए, जबकि मौके पर 10 और 12 एमएम सरिया का उपयोग होता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि कम मोटाई वाले सरिया का उपयोग किया गया तो भविष्य में कलवर्ट की मजबूती प्रभावित हो सकती है। इस संबंध में कनीय अभियंता सुधीर कुमार मंडल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मनरेगा के तहत बन रहे इस आरसीसी कलवर्ट की प्राक्कलित लागत लगभग 9 लाख रुपये है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरी तरह तकनीकी प्राक्कलन के अनुसार किया जा रहा है। कनीय अभियंता ने बताया कि कलवर्ट की दीवारों और अन्य संरचनात्मक हिस्सों में 10 एवं 12 एमएम सरिया का उपयोग प्रावधान के अनुसार किया जा रहा है, जबकि कलवर्ट की छत की ढलाई के समय 16 एमएम सरिया लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती जा रही है और कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है।

ग्रामीणों का मानना है कि निर्माण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो जाने पर इसका सीधा लाभ हजारों किसानों और आम लोगों को मिलेगा। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा बल्कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। क्षेत्र के लोगों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन और तकनीकी विभाग की निगरानी में यह महत्वपूर्ण परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी होगी और विकास की नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी।

  

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