मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता विजय कुंवर का निधन, 1977 के छात्र आंदोलन से की थी राजनीति की शुरुआत

मुजफ्फरपुर: गायघाट प्रखंड के केवटसा निवासी बीजेपी के वरिष्ट नेता और पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय कुंवर का सोमवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी। उनकी राजनीति छात्र समय से ही सक्रिय थी। जैसे ही लोगो को उनके निधन की खबर मिली, भारी भीड़ उनके आवास पर जुट गई। इधर भाजपा कार्यकर्ताओ और समर्थकों ने उनके निधन को पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

विजय कुंवर का राजनीति जीवन समर्पण और संघर्ष से भरा रहा। दरअसल उन्होंने राजनीति की शुरुआत 1977 के छात्र आंदोलन से की थी और फिर पीछे मुड़ कर नही देखा, राजनीति में अपनी सक्रियता दिखाते रहे। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद उन्होंने पार्टी को क्षेत्र में जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई  विजय कुंवर भाजपा के गायघाट से प्रखंड मंडल अध्यक्ष रहे और फिर प्रदेश संगठन में भी विभिन्न जिम्मेदारी संभाली। 1995 के दौर में आनंद मोहन के खिलाफ अपनी राजनीति चुनाव मजबूती से लड़ी और एक अलग पहचान बनाया था।

भाजपा पार्टी की टिकट से गायघाट विधानसभा क्षेत्र से मैदान में आए थे और उनके खिलाफ आनंद मोहन खरे थे। फिर भी उन्होंने उस चुनाव में अपनी एक अलग राजनीति पहचान बनाई और लोगो से जुड़े.म  वो अपनी निष्ठा, विचार और संभाव की वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं और लोगो के बीच बेहद लोकप्रिय थे। यही लोकप्रियता की वजह से उनके निधन की खबर पर जिला और क्षेत्र के आसपास से लोग उनके अंतिम दर्शन को पहुंचने लगे।

नेताओ ने शोक व्यक्त करते हुए खा की उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। विजय कुंवर गायघाट में पार्टी के एक मजबूत स्तंभ के रूप में हमेशा से खड़े रहे। संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओ को जोड़ने में उनके योगदान को कभी भी भुलाया नही जायेगा। उनका अचानक जाना पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है जिसका भरपाई शायद संभव नहीं है। उनके निधन पर भाजपा सांसद डॉ राजभूषण निषाद, स्थानीय प्रमुख श्रवण कुमार सिंह, स्थानीय सांसद प्रतिनिधि शशांक शेखर, गायघाट युवा नेता प्रभात किरण, स्थानीय विधायक प्रतिनिधि, भाजपा मंडल अध्यक्ष, राघवेंद्र सिंह, विपिन सिंह, सहित सैंकड़ों कार्यकर्ताओ ने गहरी शोक संवेदना संसार किया।

मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट

  

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