मुख्य सड़क किनारे कचरे का अंबार, दुर्गंध और संक्रमण से लोगों की बढ़ी चिंता

बरारी से पूर्णिया जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे खुले में डंप हो रहा नगर पंचायत का कचरा, स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

कटिहार: कटिहार के बरारी नगर पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बरारी से पूर्णिया जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे नगर पंचायत द्वारा बड़े पैमाने पर कचरा डंप किए जाने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क किनारे फैले कचरे के ढेर से उठ रही दुर्गंध, उड़ता प्लास्टिक और आवारा पशुओं की आवाजाही से क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रतिदिन हजारों लोगों के आवागमन वाले इस मार्ग पर कचरे का अंबार नगर पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। वर्षा का पानी कचरे से निकलने वाले दूषित तरल पदार्थ को आसपास के क्षेत्रों में फैला देता है, जिससे मिट्टी और जल स्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं तेज धूप में पूरे इलाके में असहनीय दुर्गंध फैल जाती है, जिससे सड़क से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। कचरे के ढेर पर आवारा पशु और कुत्ते भोजन की तलाश में मंडराते रहते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है। साथ ही मक्खी, मच्छर और अन्य कीट तेजी से पनपते हैं, जो आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खुले में लंबे समय तक कचरा जमा रहने से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, डायरिया, हैजा, टाइफाइड, फूड पॉइजनिंग, त्वचा संबंधी संक्रमण और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यदि प्लास्टिक या अन्य कचरे को जलाया जाता है तो उससे निकलने वाला जहरीला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाने के साथ फेफड़ों और हृदय संबंधी रोगों का कारण भी बन सकता है। नगर पंचायत की यह डंपिंग साइट मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे होने के कारण बाहर से आने वाले लोगों के बीच भी नगर की छवि प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन खुले में कचरा डंप होने से अभियान की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नगर पंचायत को वैज्ञानिक तरीके से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू करनी चाहिए। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग संग्रह कर उसका निस्तारण किया जाए। डंपिंग स्थल को मुख्य सड़क और आबादी से दूर विकसित किया जाए तथा वहां कंपोस्टिंग और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था हो। साथ ही नियमित फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और कचरे की प्रोसेसिंग से संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है।

मामले में नगर पंचायत की मुख्य पार्षद बबीता कुमारी ने कहा कि नगर पंचायत क्षेत्र की स्वच्छता हमारी प्राथमिकता है। मुख्य सड़क के किनारे कचरा जमा होने की समस्या को गंभीरता से लिया गया है। कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और डंपिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और नगर पंचायत से मांग की है कि मुख्य सड़क के किनारे खुले में कचरा डंप करने की व्यवस्था को जल्द समाप्त कर वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू की जाए, ताकि लोगों को दुर्गंध, प्रदूषण और संभावित बीमारियों से राहत मिल सके।

  

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