उद्यान निदेशक के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का किया निरीक्षण
- by Manjesh Kumar
- 02-Aug-2026
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पूर्णिया: राज्य के किसानों तक कृषि योजनाओं और अनुदानित इनपुट का सीधे लाभ पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार सरकार के उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार के नेतृत्व में गठित उच्चस्तरीय निरीक्षण दल ने जिले का क्षेत्र निरीक्षण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, बीज वितरण व्यवस्था और हरदा/गुलाबबाग मखाना मंडी की जमीनी पर कार्यप्रणाली निरीक्षण कर व्यवस्थागत सुधार लागू करना है। हमारे सुशासन प्रणाली विश्वास आधारित व्यवस्था के निर्माण पर टिकी है।
क्षेत्रीय निरीक्षकों का उद्देश्य व्यापारियों को परेशान करना या केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है बल्कि प्रणालीगत बाधाओं को दूर करना, मूल्य-अनुपालन सुनिश्चित करना, किसानों को अनुचित शोषण से बचाना और यह सुनिश्चित करना कि राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का शत-प्रतिशत लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना है। किसान कॉल सेंटर पोर्टल पर दर्ज किसानों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बनमनखी (हेमनगर) श्रीनगर (शिलमारी) एवं के नगर (चंपानगर) के चिन्हित खुदरा विक्रेताओं का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान POS मशीन के लेन-देन डेटा और गोदाम में उपलब्ध वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान किया गया। खुदरा उर्वरक विक्रेताओं के निरीक्षण के क्रम में महावीर एंड सन्स, रिया फर्टिलाइजर एवं कुशवाहा बीज भंडार का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कुशवाहा बीज भंडार से बीज का नमूना संग्रहित किया गया। साथ ही, थोक उर्वरक विक्रेता अंकित फर्टिलाइजर के प्रतिष्ठान से उर्वरक का नमूना भी संग्रहित किया गया। विक्रेताओं को कड़ा निर्देश दिया गया कि नीम-लेपित यूरिया की बिक्री सरकार द्वारा निर्धारित ₹266.50 प्रति 45 किलो बैग की दर पर ही हो। "परिवहन लागत के बहाने अधिक मूल और सुनने के तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार की 'समान भाड़ा नीति' के तहत कंपनियों को रेक प्वाइंट से प्रखंड तक का भाड़ा पहले ही प्रतिपूर्ति किया जाता है। जांच में पाया गया कि विक्रेताओं के पास खाद की बिक्री किसान को ही की जा रही है अथवा प्लाईवुड निर्माताओं को, इसकी जांच का कोई प्रावधान नहीं है। इसके कारण कृषि हेतु अनुदानित यूरिया के दाम में 9-10 गुना अंतर पाया गया जो विचलन का प्रमुख कारण ज्ञात हुआ। इसे रोकने हेतु संबंधित पदाधिकारी को निर्देशित किया गया है।
यूरिया के साथ नैनो-यूरिया, जिंक या अन्य कीटनाशकों को जबरन बेचने (टैगिंग) पर सख्त चेतावनी दी गई। निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर NPK या TSP बेचने वाले दुकानदारों के लाइसेंस तत्काल निलंबित/रद्द किए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान कई वितरकों के सैम्पल को जाँच हेतु भेज गया। जबरन टैगिंग को रोकने हेतु IFMS में अविलंब प्रावधान करने का निदेश दिया गया ताकि विपत्र में टैगिंग का कोई विकल्प ही उपलब्ध ना हो। कंपनियों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं की एक सामूहिक बैठक हेतु निर्देशित किया गया। ऑफ़लाइन लेन-देन, देर रात की प्रविष्टि और एक दिन में 100 बोरी से अधिक की बिक्री का डेटा विश्लेषण कर गैर-कृषि या औद्योगिक विचलन को पूर्णतः रोका जाएगा।
बिहार राज्य बीज निगम के खरीफ 2026-27 बीज आवंटन में पाई गई विसंगतियों पर ध्यान आकर्षित किया गया। MIS में पूर्णिया के लिए 8 क्विंटल बीज दर्शाए जाने के बावजूद ज़मीन स्तर की रिपोर्ट में 100% प्राप्ति के दावे का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। BBSL द्वारा 45 दिनों से उक्त बीज के ट्रांजिट में रहने का स्पष्टीकरण अविलंब प्राप्त करने का निर्देश दिया गया। कम अंकुरण की शिकायतों को समाप्त करने के लिए जिला स्तर पर प्राप्ति-द्वार पर लॉट-वार अंकुरण परीक्षण को अनिवार्य कर दिया गया है। समयावधि समाप्त हो चुके बीज लॉट को तत्काल जब्त किया जाएगा। हरदा मखाना मंडी में सुधार और अमानक बोर इकाई व्यापार में विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 24 का उल्लंघन है। मंडी में प्रमाणीकृत डिजिटल कांटे का उपयोग पायलट आधार पर 10 मंडी से शुरू करने हेतु माप तौल नियंत्रक को निर्देशित किया गया साथ ही नमी जांच के लिए आधिकारिक कियोस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए ताकि अमानक 'ढलता' (कटौती) पर रोक लग सके।
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड व GI टैग का उपयोग
मखाना बोर्ड के मानकों के अनुसार सुता -वार (4,5,6,7 सुता) ग्रेडिंग कर प्रतिदिन के न्यूनतम/अधिकतम दरों का मंडी में सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाएगा ताकि किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिल सके। इसका प्रारंभ 10 मंडी से प्रारंभ करने का निर्देश दिया गया। साथ ही फोड़ी का कार्य करने वाले किसानों को सुरक्षा किट, स्वास्थ्य चेक अप, शौचालय एवं शुद्ध पीने के पानी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया। वास्तविक आवश्यकताओं के आलोक में सरकारी सहायता के सूत्रण हेतु जिला उद्यानिकी पदाधिकारी एवं सभी किसानों की एक बैठक कल आयोजित करते हुए विभाग को आवश्यकता और सहयोग हेतु अविलंब प्रस्ताव समर्पित करने का निर्देश दिया गया। नीति की व्यवहार्यता जमीन स्तर की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का सख्त निर्देश सभी पदाधिकारी को दिया गया।
निदेशक उद्यान, बिहार द्वारा पूर्णिया में इथेनॉल कारखाना एवं भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय का निरीक्षण किया। उद्यान निदेशक ने जिले के नगर प्रखंड अंतर्गत परोरा स्थित इथेनॉल कारखाना का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने इथेनॉल प्रसंस्करण की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया तथा कारखाना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं अन्य तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों को किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताते हुए उत्पादन एवं गुणवत्ता के उच्च मानकों को बनाए रखने पर बल दिया। इसके उपरांत निदेशक उद्यान ने भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय का भ्रमण किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के वैज्ञानिकों के साथ आयोजित बैठक में मखाना की उन्नत खेती एवं गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन पर विस्तार से चर्चा की गई।
निदेशक उद्यान ने वैज्ञानिकों को मखाना के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा अनुसंधान आधारित नई-नई उत्पादन तकनीकों का विकास करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि इन तकनीकों का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रशिक्षण, किसान गोष्ठियों, प्रदर्शनियों एवं अन्य विस्तार गतिविधियों के माध्यम से किया जाए, ताकि अधिकाधिक किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन, उत्पादकता एवं आय में वृद्धि कर सकें। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि आधारित उद्योगों तथा विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत तकनीक एवं आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे राज्य में उद्यानिकी एवं मखाना क्षेत्र के सतत विकास को नई गति मिलेगी और किसानों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित होगी।


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