ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में पूर्णिया के मेडिकल दुकानों का शटर रहा बंधा परेशान होते रहे मरीज

पूर्णिया: ऑनलाइन दवा खरीद बिक्री के विरोध में देश भर मेडिकल दुकानें बंद रहीं। राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण दवा की खरीद बिक्री नहीं हुई। दवा दुकानों का शटर गिरा था और ताले लटके रहे। पूर्णिया के मेडिकल हब लाइन बाजार में लगभग 4000 दवा दुकानें बंद रही। पूर्णियां में इससे 5 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले पूर्णिया शाखा के सदस्यों ने एकजुट होकर विरोध करते हुए अपनी आवाज को बुलंद की। हर दिन मरीजों से भरा रहने वाला लाइन बाजार पूरी तरह खाली रहा।

कोसी सीमांचल के सात जिले के अलावा बंगाल और नेपाल से भी लोग इलाज कराने पूर्णिया आते हैं। दवा नहीं मिलने से लोगों की आवाजाही काफी कम दिखी। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान संगठन ने जिले में तीन दवा दुकानों को खोलने की अनुमति दी ताकि गंभीर मरीजों को दवा के कारण मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़े। इस दौरान काफी संख्या में मरीज के परिजन दवा खरीदते नजर आए।

एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अशोक आचार्य के नेतृत्व में दवा दुकानदारों ने एक दिवसीय हड़ताल कर ऑनलाइन दवा खरीद को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। ‌संगठन के सचिव लालमोहन सिंह ने कहा कि ऑनलाइन दवा की बिक्री से छोटे दुकानदार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग डॉक्टर के पर्ची के आधार पर मरीजों को दवा देते हैं जिसमें दवा के कंपोजिशन का ख्याल रखा जाता है जबकि ऑनलाइन में उसे देखने वाला कोई नहीं है। संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक आचार्य ने कहा कि दवा खरीदते वक्त सावधानी बरतना जरुरी है क्योंकि यह आपके सेहत से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में सरकार ने मरीज को ऑनलाइन दवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था मगर उसके बाद इससे संबंधित कोई भी कानून नहीं बनी जिसकी वजह से अब ऑनलाइन दवा कंपनी इसका लाभ उठाते हुए बेरोक टोक दवा बेच रही है। हम लोग इमरजेंसी दवा बेचते हैं।

अशोक आचार्य ने कहा कि ऑनलाइन दवा में नकली दवा भी बेचा जा रहा है जिससे मरीजों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है सरकार इस पर ध्यान दें। इस मौके पर कोषाध्यक्ष अजय भगत, उपाध्यक्ष सुनील कुमार, संयुक्त सचिव अनिल अग्रवाल, संगठन सचिव हाफिज सभी अख्तर दीपक पंसारी, पियूष जायसवाल, असरफ कादरी, विनोद कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे।

  

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